Sunday, 11 October 2026

Lecture 005. What is Manifest Self? Vishnu = Wajhullah = Self

Lecture 005. What is Manifest Self? Vishnu = Wajhullah = Self

मेरी किताब ‘वन गाड वन रिलीजन’, जो चार हिस्सों में है, उसमें मैंने साबित किया है कि डिवाईन क्रिएशन प्लान हर हर ज़माने में एक ही रहा है और खुदा की ओर से आई तमाम किताबें एक ही बात कर रही हैं।

हमने पिछले लैक्चर में देखा कि एबसोलूट गाड का, बहुत से लोगों को इस बात पर यक़ीन भी नहीं होगा और शायद जानते भी नहीं थे, कि गीता और उपनिषद उस एकमैव एबसोलूट गाड के मैसेज को कितना शिद्दत से reinforce कर रहे हैं। आपको हम ने दिखाया कि जिस लेवल पर कुरान में एक खुदा की बात हो रही है, उसी लेवल पर गीता और उपनिषद में भी बात हो रही है और यहूदी और ईसाई भी उसी एक खुदा को अपना रब और क्रिएटर मानते हैं जो जिस्म-ओ-जिस्मानियात से मुबररा है, जो क़ादिरे मुतलक़ है; ठीक इन्हीं शब्दों मेें गीता और उपनिषद भी सृष्टि के एकमैव क्रिएटर को पहचनवा रहे हैं।

दूसरा उल्लेख जो हमने पिछले लैक्चर्स में देखा वो परमात्मा का है। बहुत से ज्ञानी लोग भी नहीं समझ पाते कि परमात्मा का अस्ल में क्या रिश्ता है इस एबसोलूट गाड से या इस डिवाईन क्रिएशन प्लान में उसका क्या रोल है?

एबसोलूट गाड की जो बात जो हो रही है गीता और उपनिषद में बहुत से लोग जब उसको सही सही नहीं समझ पाते तो इस नतीजे पर पहुंचते हैं कि परमात्मा equivalent है अल्लाह का। जबकि हमने साबित किया कि परमात्मा जो कृष्ण के मुख से First Person में बात कर रहा है वो निराकार एबसोलूट की बात Third Person में कर रहा है और उसे सब से बड़ा दिखा रहा है। गीता पढ़ने पर साफ दिखाई दे रहा है कि कृष्ण के मुख से बात करते हुए परमात्मा की भी ख्वाहिश यही है कि इंसान एबसोलूट गाड की पूजा और इबादत करे, उसको पहचाने और उस तक पहुंचने की निरंतर कोशिश करे। और साफ कह रहा है कि किसी abstract, non-visible God तक पहुंचना क्योंकि हर किसी के लिए मुमकिन नहीं है इसलिए तुम साकार ताक़त यानी विष्णु यानी परमात्मा के आगे भी नतमस्तक हो सकते हो, लेकिन बेहतर यही है कि तुम निराकार एबसोलूट - जिसे मुसलमान अल्लाह कहते हैं - बस उसी के आगे सिर झुकाओ और उसी की इबादत और वंदना करो।

दूसरी तरफ मुसलमानों में कोई साफ कानसैप्ट है ही नहीं कि परमात्मा कौन है। जब मुसलमानों में परमात्मा का कानसैप्ट नहीं है तो फिर मैं कैसे कह रहा हूं कि हर खुदाई किताब में एक ही बात हो रही है? अब तक की मुसलमानों की कुरान की समझ को देखें तो कुरान में बज़ाहिर हमें नहीं दिखाई देता कि परमात्मा की बात हो रही हो।

हम को समझना पड़ेगा कि ये कानसैप्ट है क्या? परमात्मा कौन है, उसका क्या रोल है? ब्रहदअराण्यका उपनिषद और पेंगल उपनिषद आदि बता रहे हैं कि एबसोलूट गाड ने, यानी कादिरे मुतलक़ खुदा ने, जब खिलक़त करना चाही, जब उसने चाहा कि क्रिएट करे, तो सबसे पहले उसने एक मैनिफैस्ट सैल्फ क्रिएट किया, यानी एक नुमायां, दिखाई देने वाली ताक़त क्रिएट की, जो नूर की शकल में यानी दिव्य रूपी भी था, और रूह यानी आत्मा की शक्ल में भी था, उसको परमात्मा कहा गया।

यहां पर कुछ नादान लोग हो सकता है कि कहें कि एक खुदा के आगे दूसरे खुदा की बात हो रही है। लेकिन ऐसा नहीं है। ब्रहद अराण्यका उपनिषद क्या कह रहा है देखिए और फिर नतीजा निकालिएगा।

Brhad-aranyaka Upanishad.I.II.1

There was nothing whatsoever, here in the beginning. By death indeed was this covered, or by hunger for hunger is death. He created the mind, thinking ‘let me have a self’. The he (self) moved about, worshipping. From him thus worshipping, water was produced. ‘Verily’ he thought, while I was worshipping water appeared, therefore water is called arka (fire). Water surely becomes one who thus knows the reason why water is called arka (fire).

कहा जा रहा है कि उसकी ख़्वाहिश थी कि एक नूमायां ताक़त - सैल्फ - क्रिएट हो। उस नूरे ज़ाती - सैल्फ ने - क्रिएट होते ही इबादत शुरू कर दी। किसकी ... निराकार एबसोलूट यानी कादिरे मुतलक़ खुदा की। ख़्वाहिश थी निराकार एबसोलूट की और बस ख्वाहिश करने पर ही मैनिफैस्ट सैल्फ यानी नूरे ज़ाती क्रिएट हो गया। कुरान कह रहा है कि वो ख़्वाहिश करता है ‘कि हो जा’ और बस हो जाता है।

यहां ये मुग़ाल्ता न रहे कि ये भी खुदा और वो भी खुदा... दो खुदा नहीं हैं। इस मैनिफैस्ट सैल्फ यानी परमात्मा ने एबसोलूट खुदा की इबादत की ये दिखाता है कि मैनिफैस्ट सैल्फ यानी परमात्मा भी निराकार एबसोलूट को अपना क्रिएटर मानता है। वो तो पहला क्रिएशन है और इस कारण सब से अधिक ताक़तवर है। एक जगह लिखा है कि कड़ी इबादत और बंदगी के बाद इसने चाहा कि इबादत करने वाले और हों, तो आगे के क्रिएशन की इसको इजाज़त मिल गई। या यूं कहें कि आगे का क्रिएशन इस पहली क्रिएशन से वुजूद में आता चला गया। ये है बिग बैंग की असली हक़ीक़त!

फिर से दोहरा रहा हूं कि कोई मुग़ाल्ता न रहे! एक एबसोलूट खुदा गीता और उपनिषद की रू से भी साबित है और यदि परमात्मा की बात करें तो ये भी साबित है कि परमात्मा का भी ख़ालिक़ यानी क्रिएटर एबसोलूट गाड ही है, जिसकी इबादत परमात्मा भी करता है।

मैनिफैस्ट सैल्फ का अगर आप लिटरल अनुवाद देखें तो कुरान में वो अनुवाद आया है ‘वजहुल्लाह’ के नाम से, यानी ‘अल्लाह का चेहरा’। यहां तक कहा गया कि जब सारी दुनिया समेट और लपेट ली जाएगी तो कुछ नहीं बचेगा सिवाय अल्लाह के चेहरे यानी वजहुल्लाह के।

कुरान में बहुत सी बातें हैं जिनको अभी तक हम सही सही समझ पाने से क़ासिर रहे हैं। जैसे कुरान में अर्श और कुर्सी का ज़िक्र है। और इस पर बहुत ज़्यादा डिबेट्स हैं - कि अल्लाह अगर निराकार हर जगह मौजूद ताक़त है तो फिर अर्श और कुर्सी का उल्लेख क्यों? गीता और उपषिद पढ़े बिना मुसलमान कुरान के इस राज़ को समझ ही नहीं सकते।

मुसलमानों में तो फिरक़े बन गये हैं जिनमें फर्क़ इन्हीं बातों पर हैः एक कहता है कि खुदा सातवें आसमान पर एक बहुत बड़ी कुर्सी पर बैठा है और वहां से सारी सृष्टि को चलाता है। उसके हाथ पैर भी हैं और जिस्म भी और दूसरा कहता है कि ये सब बस सिम्बालिक बातें हैं, खुदा निराकार है और बस एक ताक़त है जो हर जगह मौजूद है। लेकिन अगर खुदा निराकार है और बस एक ताक़त का नाम है तो कुरान में उसके अर्श और कुर्सी का ज़िक्र क्यों?

परमात्मा का कानसैप्ट हमको देखना पड़ेगा कि अगर है तो फिर कुरान में अर्श और कुर्सी की जो बात हुई है वो भी समझ आ जाएगी।

परमात्मा का शाब्दिक अर्थ क्या हुआः

Paramatma = Higher Spirit = Grand Spirit

परमात्मा का अर्थ हुआ, सब से बड़ी आत्मा, सब से बड़ी रूह

हम को देखना होगा कि अगर कुरान में रूह की बात हो रही है तो क्या बात हो रही है। जब हम वो समझेंगे तो हम पर वाज़ेह हो जाएगा कि परमात्मा के अस्ल मायनी क्या हैं? और सनातन धर्मियों को भी एकदम साफ साफ समझ में आ जाएगा कि परमात्मा दरअस्ल क्या है, जो कानसैप्ट अब तक उनमें बिलकुल साफ नहीं है। परमात्मा का निराकार एबसोलूट खुदा से क्या रिश्ता है, परमात्मा का देवताओं से और अवतारों से क्या रिश्ता है, ये आज लोगों को नहीं पता। लोग ये ज़रूर कहते हैं कि निराकार ने साकार ताक़त क्रिएट की तो वो मैनिफैस्ट सैल्फ कहलाया; लेकिन ये मैनिफैस्ट सैल्फ ही परमात्मा है, ये भी बिलकुल वाज़ेह नहीं है।

कुरान की आयतुल कुर्सी में अर्श और कुर्सी यानी सिंहासन की बात हुई है। कुरान के सूरह ग़फीर की 15वीं आयत कह रही है कि उस सिंहासन का मालिक भी अल्लाह यानी एबसोलूट गाड है। फिर इस कुर्सी पर कौन विराजमान है?

Quran.40.15

Possessor of the Highest Ranks, Owner (of) the Throne; He sends the Special Spirit of His Command upon whom He wills of His slaves, to warn (of the) Day (of) the Judgment.

कहा जा रहा हैः दरजात बुलंद करने वाला, अर्श का भी मालिक एबसोलूट गाड यानी अल्लाह है। वो मालिके अर्श अपने बंदों में से जिस पर चाहता है रूह अपने हुक्म से अलक़ा फरमाता है ताकि वो लोगों को हिसाब किताब के दिन से डराए।

रूह की बात हो रही है। लेकिन बड़ी समस्या ये है कि अनुवादक, जब नहीं समझ पाए कि क्या बात हो रही है, तो उन्होंने अपनी मर्ज़ी से कुछ भी अनुवाद कर दिया। यहां पर रूह के आगे कुछ अनुवादकों ने ‘वही’ लिख दिया है। इंगलिश के किसी अनुवादक ने ब्रैकिट में ‘inspiration’ लिख दिया है। कहा जा रहा है कि अल्लाह जिस पर चाहता है उसपर अपने हुक्म से रूह भेज देता है और लोगों ने अनुवाद क्या किया कि जिसपर चाहता है ‘वही’ भेज देता है।

कहा जा रहा है कि खास रूह भेजी जाती है उनपर जिनको पसंद कर लिया गया, जो कुछ खास थे तब तो उन्हें चुना गया, जब उनकी ओर खुदा अपनी खास रूह को भेज देता है, तो वो रसूल का काम करने लग जाते हैं। कुरान में भेजने की बात हो रही है, ‘हम ने भेजा रसूल’। कहां से भेजा? जिस्म के साथ तो भेजा नहीं? तो क्या चीज़ भेजी? साफ है, कि रूह को भेजा। और जब रूह को भेजा उस खास जिस्म की तरफ जिसने इताअत और इबादत से पाकीज़गी की खास मंज़िल पा ली थी, तो वो रिसालत का काम करने लग गई, यानी अवतार कहलाई।

रूह एक अम्र है अल्लाह का, उसकी ताक़त का; उसके क्रिएशन प्लान का एक हिस्सा है। अल्लामा तबातबाई ने तफसीरे मीज़ान में लिखा हैः

Tafseer-e-Meezan

This rooh (spirit) is put inside those chosen as Messengers; otherwise this spirit resides with the Angels in heaven… this rooh (spirit) is the basis of life and it was this that was blown into Adam, also a Messenger.

वो कह रहे है कि जिन लोगों को मुनतख़्ब किया जाता है उनके अन्दर ये रूह डाल दी जाती है; वर्ना ये फरिश्तों (angels) के साथ जन्नत में रहती है। इस रूह से ही सारी ज़िंदगी है और इसको ही आदम के अन्दर डाला गया था, क्योंकि वो भी पैगम्बर थे।

मैं अल्लामा तबातबाई की इस बात पर तो मुत्तफिक़ हूं कि जिन लोगों को पैग़म्बरी के काम के लिए चुन लिया जाता था, उनके अन्दर रूह डाल दी जाती है। इससे भी मुत्तफिक़ हूं कि जो एक दिव्यात्मा यानी नूरानी रूह बनी थी जिससे 7 दिव्यात्माएं यानी नूरानी रूहें क्रिएट हुईं, तमाम काएनात यानी सृष्टि उस की ताक़त के अन्दर है और इस लिए ये कहना ग़लत नहीं होगा कि रूह से ही सारी ज़िंदगी है।

लेकिन जैसा हमने ईसाई किताबों में पाया, कि आदम के साथ सातों रूहें ज़मीन पर भेजी गईं, हमारा मानना ये है कि जब से आदम इस दुनिया में आए हैं, ये 7 की 7 रूहें ज़मीन पर ही हैं। वर्ना ऐसे कैसे हो सकता है कि गुमराह करने वाली ताक़त ज़मीन पर इंसान को बहकाए और हिदायत देने वाली ताक़त ज़मीन पर न रहे। ये रूहें इंसानी जिस्म में रह कर हिदायत देने का काम करती हैं, कभी इनको पैग़म्बरी अता होती है और कभी ये ख़ामोशी से दुनिया के किसी गोशे में बैठी अपना काम कर रही होती हैं।

आदम के अन्दर भी ये रूह थी, इस से भी मैं इत्तेफाक़ नहीं रखता। मैंने अपनी किताबों में बारहा नबी और अवतार के बीच का फर्क़ ब्यान किया है। नबी वो है जिसने तपस्या की और एक रूहानी मक़ाम पर पहुंचा, और उसकी तपस्या से खुश होकर इन नूरानी रूहों ने उसको नुबूवत अता की और उसके मस्तिष्क में इल्हामी तौर ़पर बहुत से राज़ ज़ाहिर हो गये। लेकिन दूसरा लेवल अवतार है। ये वो लेवल है जब 7 में से कोई एक नूरानी रूह किसी तपस्या से पाक किए गये किसी इंसानी जिस्म को आफिस के रूप में चुन लेती है। जिस किसी जिस्म को भी किसी नूरानी रूह ने अपने आफिस के रूप में चुना, वो अवतार कहलाया। इस जिस्म से परमात्मा यानी विष्णू यानी वजहुल्लाह खुद वक़्ते ज़रूरत बात करता है।

आदम नबी थे और रसूल नहीं थे, इसका सबूत कुरान की उस आयत से मिल सकता है जिसके मुताबिक़ जब आदम बहुत ग़मग़ीन थे कि उन्हें जन्नत से निकाल कर ज़मीन पर भेज दिया गया तो खुदा ने उनसे कहा कि तुम को उस वक्त तक इंतेज़ार करना होगा जब तक कि तुम्हारे दरमियान हिदायत न आ जाए।

Quran.2.38

“We said, ‘Go down from it, all of you. And when guidance comes to you from Me, whoever follows My guidance – there will be no fear concerning them, nor will they grieve.”

आखिर नबी को कौन हिदायत दे सकता है? साफ है जब 7 में से कोई एक नूरानी रूह ज़मीन पर किसी इंसानी जिस्म को आफिस के तौर पर चुनेगी तो वो अवतार कहलाएगा। अवतार के बताए मार्ग पर चल कर ही मोक्ष यानी निजात यानी सैलवेशन है और उसके मार्ग को झुठलाने वाला ही काफिर है।

कुरान के अनेक कमेंटेटर्स जब इस राज़ को नहीं समझ पाए तो उन्होंने रूह से मतलब जिब्रील निकाला जो कि एक फरिश्ता यानी angel हैं। अल्लामा तबातबाई ने लिखा है कि ये रूह फरिश्तों के साथ जन्नत में रहती है लेकिन हक़ीक़त ये है कि फरिश्ते इन नूरानी रूहों यानी दिव्यात्माओं के ही मातहत हैं और इनकी खि़लक़त के बाद बनाए गये। दरअस्ल जब मैनिफैस्ट सैल्फ यानी विष्णू यानी परमात्मा यानी वजहुल्लाह ने क्रिएट होते ही निराकार एबसोलूट की पूजा और इबादत शुरू कर दी और उसने चाहा कि पूजा और इबादत करने वाले और अधिक हों, जैसा कि ब्रहद अराण्यका उपनिषद में वर्णित है, तो इसने ब्रहमा नामी दिव्यात्मा शक्ति बनाई जो 7 नूरानी रूहों यानी दिव्यात्माओं में बंट गई जिसमें एक देवी थी; लेकिन इन नूरानी रूहों के कामों को अंजाम देने के लिए फरिश्तों यानी angels को क्रिएट किया गया। ब्रहमा नामी नूर के खिलाफ उतनी ही शक्तिशाली जुलमत क्रिएट हुई जो तामसिक यानी असुरी ताक़त है।

मेरी बात का एक सबूत ये है कि जब कुरान में आलीन का ज़िक्र हुआ और फरिश्तों और आदम के सामने उनके नाम बताए गये जिनके पहले ही नाम रखे जा चुके थे - the named ones - और फिर उन शख्सियतों को फरिश्तों और आदम के सामने पेश किया गया तो फरिश्ते उन शख्सियतों को नाम से नहीं पहचान पाए जबकि आदम ने देखते ही बता दिया कि ये फलां हैं, ये फलां हैं। ये शख्सियतें पहले से मौजूद थीं लेकिन आदम की खि़लक़त के वक़्त तक फरिश्तों ने इनको नहीं देखा था।

दूसरा सबूत हमें पैग़म्बर मौहम्मद के अर्श तक के सफर में देखने को मिलता है। हदीसे क़ुदसी के मुताबिक़ जब जिब्रील, जो सब फरिश्तों में अफज़ल हैं, अर्श के सफर पर गये तो एक मक़ाम ऐसा आया कि जिससे आगे जिब्रील ने जाने से मना कर दिया। ये मक़ाम सिदरतुल मुन्तहा का मक़ाम है। इस मक़ाम से आगे ही दिव्यात्माएं यानी नूरानी रूहें यानी देवता मुक़ीम थे क़ब्ल इसके कि वो आदम और फरिश्तों के सामने पेश हुए और उनको नाम से पहचानने को कहा गया।

जिन पैग़म्बर के अन्दर नूरानी रूह यानी दिव्यात्मा थी वो आगे बढ़ते चले गये, जबकि जिब्रील पीछे ही रूक गये। कुरान बताता है कि मौहम्मद और उनके रब में दो कमान या उससे भी कम का फासला रह गया। ये आयत बताती है कि ये दिव्यात्माएं यानी नूरानी रूहें फरिश्तों के साथ नहीं बल्कि परमात्मा यानी वजहुल्लाह के साथ मुक़ीम रहती हैं, उस मक़ाम को कुरान ने क़ौसैन कहा और बताया कि ज़मीन पर बना काबा अर्श पर मौजूद क़ौसैन की निशानी है।

जो शख़्सियतें अर्श पर रहती थीं, उनको ज़मीन पर जिस मक़ाम पर आना था, वो काबा था। हिदायत देने वाली इन शख़्सियतों को एक के बाद एक जिस जगह पर आना था, सब से पहले आदम ने उस मक़ाम पर जा कर एक निशानी क़ायम की, क्योंकि उनसे बताया जा चुका था कि तुम को ज़मीन पर उस वक़्त तक रहना है जब तक कि तुम्हारी जानिब हिदायत न आ जाए। फिर इब्राहीम ने अल्लाह के हुक्म से ब्याबान में अपनी पत्नी हाजिरा और बेटे इस्माईल को छोड़ा और वहां चमत्कार से पानी बरामद हुआ और आबादी बसी और काबा की दीवारें इब्राहीम और इस्माईल ने मिल कर बुलंद कीं, क्योंकि ये वो बैतुल्लाह था जहां अर्श पर बने घर के अस्ल मकीनों को अवतरित होना था। यही सबब था कि जब वो शख़्सियतें ज़मीन पर इंसानी जिस्मों में आईं तो उनको अहललबैत यानी अल्लाह के घर के लोग कहा गया।

उधर हम देखते हैं कि राम और कृष्ण के मुंह से परमात्मा बात कर रहा है। यानी बात कृष्ण कर रहे हैं और हम पाते हैं कि फस्र्ट पर्सन में ‘मैं’ या ‘हम’ के साथ परमात्मा बात कर रहा है। हम ने जो बड़ी ग़ल्ती की वो ये कि हमने कृष्ण को ही परमात्मा मान लिया। अस्ल हक़ीक़त ये थी कि वो पाक जिस्म थे जिनको रूह ने अपना आफिस बना लिया और उसके माध्यम से हिदायत के काम को आगे बढ़ाया।

कुरान में भी मौहम्मद के मुंह से आयतें आ रही थीं लेकिन परमात्मा फस्र्ट पर्सन में बात कर रहा है और एबसोलूट निराकार खुदा की बात थर्ड पर्सन में कर रहा है। कुरान ने जब रूह की बात की तो मुसलमान समझ ही नहीं पाए कि क्या बात हो रही है। उन्होंने विभिन्न अर्थ निकाले, कई बार कहते हैं कि रूह से मुराद जिब्रील हैं, कई बार कहते हैं कि इससे मुराद किताब है, कई बार इंस्पिरेशन मतलब निकालते हैं; हर जगह जहां कुरान में ‘रूह’ का लफ्ज़ आया है, हमने ब्रैकिट में अलग अलग मायनी लिखे हैं।

सूरह इस्रा की 85वीं आयत देखिएः

Quran (Surah Isra).17.85

They will ask ye (of Mohammad) concerning the spirit. Say: The spirit is by command of my Lord, and knowledge ye have been vouchsafed but little.

ये आयत कहती है कि वो मौहम्मद से रूह के बारे में पूछते हैं। आप कह दीजिए कि ये मेरे रब के हुक्म से है और तुम को बहुत कम जानकारी दी गई है इसके बारे में।

इससे अंदाज़ा किया जा सकता है कि किसी और मक़ाम पर मुमकिन है कि रूह के बारे में कुछ ज़्यादा बातचीत की गई हो। कुरान में ‘क़लीला’ का शब्द इस्तेमाल हुआ है लेकिन पहले की किताबों में इतनी कम जानकारी नहीं दी गई थी।

कुरान मुसलमान की पहचान बताते हुए साफ कह रहा था कि वो पहले आई तमाम किताबों और सहीफों यानी किताबचों पर न सिर्फ ईमान रखता है बल्कि उनमें फर्क़ नहीं करता। मुसलमानों ने पहले की किताबों को दूसरों की किताबें कहकर भुला दिया। और जब हमने पहले की किताबों को नहीं पढ़ा तो कुरान में जब रूह का ज़िक्र आया हम नहीं पहचान पाए।

इसी तरह मुसलमान जिस इन्ना अंज़लना सूरह को नमाज़ में पढ़ते हैं उसमें भी रूह की बात हो रही है। इसमें साफ कहा जा रहा है कि फरिश्ते और रूह नाज़िल होते हैं, यानी अवतरित होते हैं, अपने रब के हुक्म से, दुनिया में उसके काम अंजाम देने के लिए।

जब कुरान ने रूह का शब्द प्रयोग किया तो स्कालर्स ने उसका अनुवाद ‘जिब्रील’ लिखकर तमाम मायनी ही बदल डाले। अगर दयानतदार थे और रूह के मायनी नहीं समझ आ रहे थे तो रूह के मायनी रूह ही लिख दिए होते, जैसा कई कमेंटेटर्स ने किया है। उन्होंने ब्रैकिट में जिब्रील लिख दिया। लेकिन कुछ दूसरे कमेंटेटर्स ने ब्रैकिट लगाने का भी कष्ट नहीं किया और लिख दिया कि फरिश्ते और जिब्रील उतरते हैं अल्लाह के हुक्म से उसके काम बजा लेने के लिए।

जब कि कुरान कह रहा है कि अल्लाह के हुक्म से सृष्टि के जो भी काम हैं उन्हें अंजाम देने के लिए फरिश्ते और रूह अवतरित होते हैं।

ज़रा गौर कीजिए, फरिश्ते की कैटेगरी तो बताई जा चुकी, और जिब्रील फरिश्ता ही तो हैं। फिर ये कहने का क्या मतलब कि फरिश्ते और जिब्रील अवतरित होते हैं अल्लाह के हुक्म से।

और समझने के लिए कुरान का अश-शूरा सूरह देखते हैं।

Quran (Ash-Shura).42.52

Thus, have We revealed to you O Mohammad, a Spirit (inspired Book – The Quran) by Our command: while you did not know what is the Book and what is the Iman (faith)? But We have made it (The Quran) a light whereby We guide those of Our servants whom We please; and surely you are guiding mankind to the Right Way.

आप ने देखा, एक जगह रूह का लफ्ज़ इस्तेमाल हुआ तो हमने ब्रैकिट में लिखा ‘जिब्रील’ और यहां पर रूह का लफ्ज़ इस्तेमाल हुआ तो हमने ब्रैकिट में ‘कुरान’ लिख दिया।

कहा जा रहा हैः और हम ने अपने हुक्म से ऐ मौहम्मद तुम्हारी तरफ रूह को भेजा, जबकि तुम न तो किताब को जानते थे और न ईमान को। लेकिन हमने उसको नूर बनाया है कि इससे हम अपने बन्दों में से जिसको चाहते हैं हिदायत करते हैं; बेशक तुम इंसानियत को सीधा मार्ग दिखा रहे हो।

कुरान कह रहा है कि ऐ मौहम्मद, हमने तुम्हारी तरफ रूह को भेजा। यहां अगर फरिश्ता मायनी ले लेते तो मायनी ये हो जाते कि फरिश्ते को हमने नूर बनाया जिससे हम अपने जिस बन्दें को चाहते हैं हिदायत देते हैं। ये मायनी ले लेते तो फिर हिदायत देने में पैगम्बर मौहम्मद का क्या रोल रह जाता? इसलिए यहां फरिश्ता या जिब्रील मायनी नहीं लिखा और यहां पर ब्रैकिट में कुरान लिख दिया जिसके कारण हम रूह के अस्ली मायनी समझने से दूर रह गये।

अब जो मतलब निकल रहे हैं वो भी अक़ल से परे हैं। वो ये कि हम ने तुम्हारी तरफ किताब को भेजा और किताब आने तक न तो तुक किताब को जानते थे और न ईमान को। ये क्या बात हुई? किताब आई ही नहीं थी तो कैसे जानते? कहा जा रहा हैः हमने तुम्हारी तरफ रूह को भेजा और रूह आने तक न तो तुम को किताब का ज्ञान था और न ईमान।

कुरान की एक और आयत कह रही हैः ये अल्लाह की आयतें हैं जो हम तुम को ठीक ठीक पढ़ कर सुनाते हैं। कौन पढ़ रहा है? क्या मौहम्मद पढ़ कर सुना रहे हैं? नहीं! फिर क्या जिब्रील पढ़ कर सुना रहे हैं? नहीं! बल्कि परमात्मा पढ़ रहा था जो उस रूह के माध्यम से मौहम्मद के मुख से बोल रहा था जो मौहम्मद के जिस्म को आफिस के रूप में प्रयोग कर रही थी।

कुरान दिव्यात्मा यानी नूरानी रूह की बात कर रहा है, जिससे हम अपने बन्दों में से जिसको चाहते हैं हिदायत करते हैं।

एक और पहलू देखिएः वेदों और उपषिदों में दिव्यात्मा की बात हो रही है जिसका अनुवाद हम नूरानी रूह करते आ रहे हैं। कुरान की आयत कह रही है कि हमने इस रूह को नूर बनाया, जिससे साफ है कि ये नूरानी रूह यानी दिव्यात्मा की बात हो रही है, जो जब किसी खास चुने हुए बन्दे पर डाल दी जाती है तो वो अवतार हो जाता है और उसको किताब का भी ज्ञान हो जाता है और मुकम्मल ईमान भी हो जाता है।

हिन्दू स्क्रिपचर्स क्या कह रहे हैं ये बताने से पहले आईए देखते हैं कि ईसाई ग्रन्थ क्या बात कर रहे हैं।

John 14: 16 and 26

I will ask the Father, and he will give you another to be your advocate, who will be with forever – the spirit of truth. Your advocate will teach you everything, and will call to mind all that I have told you.

मैं खुदा से कहूंगा और वो तुम्हारे बीच किसी और को भेजेगा जो हमेशा हमेशा के लिए सच्चाई की रूह होगी। और वो तुम को हर चीज़ की शिक्षा देगा, और जो कुछ मैं ने तुम को बताया वो भी तुम्हारे मस्तिष्क में ताज़ा कर देगा।

साफ है कि पैगम्बर ईसा पेशिंगोई यानी भविष्यवाणी कर रहे हैं किसी दूसरे के आने की जो Spirit of Truth होगा, यानी हक़ की रूह होगी।

एक और जगह कहते हैं:

John 16:7-14

It is for your good that I am leaving you. If I do not go, your advocate will not come. When he comes, he will confute the world, and show where wrong and right and judgment lie.

There is still much that I could say to you, but the burden would be too great for you now.

However, when he comes who is the spirit of truth, he will guide you into all the truth; for he will not speak on his own authority, but will tell only what he hears; and he will make known to you the things that are coming.

आप ईसा की इस पेशिंगोई को पढ़िए और विस्तार पूर्वक पैगम्बर मौहम्मद की जिंदगी देखिए, आप पर एकदम साफ हो जाएगा कि ये उन्हीं के लिए पेशिंगोई हो रही है। कहा जा रहा है कि जो सच्चाई की रूह है, जब वो आएगी, या आएगा, तो वो आप को तमाम सच्चाई की तरफ हिदायत देगा। यहां ग़ौर करने की बात ये है कि 40 वर्ष की उम्र में जब पैगम्बर मौहम्मद ने अपनी रिसालत का एलान किया उस वक्त एक लक़ब जिससे उस ज़माने के लोग उन्हें याद करते थे वो ‘सादिक़’ यानी ‘सच्चा’ था। ये लक़ब इस लिए पड़ा था क्योंकि लोगों ने उनको सच के अलावा कुछ और बोलते देखे ही नहीं था। अवाम ने उनका खिताब ‘सादिक’’ रख दिया था जबकि उन्हें मालूम भी नहीं था कि ये व्यक्ति मौहम्मद आने वाले वक्त में अपने को रसूल यानी अवतार होने का दावा करने वाला है।

ये भी रिवायत मौजूद है कि जब पैग़म्बर मौहम्मद अपने रसूल यानी अवतार होने का दावा करने वाले थे तो वो एक पहाड़ी पर खड़े हो गये और नीचे खड़े लोगों से कहा कि अगर मैं कहूं कि इस पहाड़ी के पीछे से एक फौज तुम पर हमला करने को आ रही है, तो क्या तुम मानोगे। सब ने एक ज़बान कहा कि ज़रूर मानेंगे क्योंकि हमने आप को सच के अलावा कुछ और बोलते कभी नहीं पाया। तब आप ने एलान किया कि मैं अल्लाह की तरफ का रसूल हूं जिसको तुम्हारी हिदायत के लिए मुनतख़ब किया गया है।

और ईसा कह रहे हैं कि वो तमाम सच्चाई की तरफ तुम्हारी हिदायत करेगा। और दूसरा जुमला जो ईसा कह रहे हैं वो ये कि वो अपनी तरफ से कोई कलाम नहीं करेगा बल्कि बस वही बोलेगा जो खुदा की तरफ से सुनेगा। और कुरान की आयत कह रही हैः

क़सम है रौशन सितारे कि जब वो नीचे उतरे कि तुम्हारे रफीक़ न रस्ता भूले हैं और न भटके हैं। वो कोई बात अपनी ख़्वाहिश से नहीं करते, उनका इरशाद सरासर वही होता है जो उन्हें की जाती है।

आगे ईसा कह रहे हैं: वो बताएंगे तुम्हें वो सब जो आगे होने वाला है।

ईसा की पेशिंगोई को मौहम्मद पर पूरा उतरते देखना चाहते हैं तो पैगम्बर मौहम्मद द्वारा की गई भविष्यवाणियां देख लीजिए कि कैसे उन्होंने अपने बाद होने वाले वाक़ेयात ऐसे बताए जैसे आंखों देखा हाल सुना रहे हों। यहां तक कि हमारे समय तक की अनेक भविष्यवाणियां 1400 सालों से हदीस की किताबों में मौजूद हैं। करबला का वाक़ेया हो, कांस्टेंटीनोपल पर मुसलमानों का क़ब्ज़ा हो, या आईसिस के आतंकियों का खुरूज या फिर एंड टाईम्स में घटित होने वाली भविष्यवाणियां, जिनका अभी पूरा होना बाक़ी है; अब तक पैग़म्बर द्वारा की गई सारी भविष्यवाणियां पूरी होती नज़र आई हैं। 

मूसा के समय की एक और पेशिंगोई देखिएः

Deut.18.18-19

I will raise up for them a prophet like you (Musa), and I will put my words into his mouth. He shall convey all my commands to them, and if any one does not listen to the words which he will speak, I will require satisfaction from him.

ईसाई स्कालर्स कहते हैं कि ये जो मूसा से उनके जैसे एक नबी के आने की जो बात हो रही है, ये ईसा की बात हो रही है। लेकिन वो भूल जाते हैं कि मूसा और ईसा में एक बड़ा अन्तर ये था कि मूसा को किताब दी गई थी जबकि ईसा को किताब नहीं दी गई थी; ईसा अपने को मूसा की शरियत पर चलने वाला बताते थे।

ये भी पैगम्बर मौहम्मद के लिए ही भविष्यवाणी हो रही है कि तुम्हारे जैसा पैगम्बर मैं भेजूंगा।

मूसा ही नहीं ईसा भी किसी आने वाले की भविष्यवाणी बार बार दोहराते नज़र आते हैंः

John. 14.16 and 26

I will ask the Father, and he will give you another to be your advocate, who will be forever – the spirit of truth. Your advocate will teach you everything and will call to mind all that I have told you.

बार बार ईसा दोहरा रहे हैं कि सच्चाई की रूह आने को है जो तुम को सब कुछ सिखलाएगी और तुम को याद दिलाएगी वो सब जो मैंने बतलाया।

कुरान की तरफ पलटते हैं:

Quran.4.171

O People (of) the Book! (Do) not commit excess in your religion and (do) not say about Allah except the truth. Only the Messiah, Isa, son (of) Maryam, (was) a Messenger of Allah and His word which He conveyed to Maryam and a spirit from Him. So believe in Allah and His Messengers. And (do) not say, “Three;” desist (it is) better for you. Only Allah (is) God One. Glory be to Him! That He (should) have for Him a son. To Him (belongs) whatever (is) in the heavens and whatever (is) in the earth. And Allah is sufficient (as) a Disposer of affairs.

ऐ अहले किताब, तुम अपने दीन में हद से आगे न बढ़ो और अल्लाह की शान में सच के खिलाफ कुछ न कहो, हक़ीक़त सिर्फ ये है कि मसीह ईसा इब्ने मरयम अल्लाह के रसूल और उसकी तरफ से रूह हैं जिसे उस ने मरयम की तरफ पहुंचा दिया। पस तुम अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाओ और मत कहो कि माबूद तीन हैं।

यहां पर ईसाईयों के मौजूदा तीन के कानसैप्ट को नकारा जा रहा है जिसके अनुसार उन्होंने अल्लाह, रूह और अल्लाह के बेटे का कानसैप्ट क्रिएट कर लिया था जो ग़लत समझ पर आधारित था। अल्लाह ने कुरान में उस कानसैप्ट को नकारा है लेकिन रूह को नहीं नकारा। साफ कहा जा रहा है कि रूह उसकी तरफ से है। यहां ईसा की बात हो रही थी तो मुसलमानों ने रूह के मायनी रूह ही लिए लेकिन जब मौहम्मद की तरफ रूह भेजने की बात कुरान कर रहा था तो मुसलमानों ने अनाप शनाप मायनी पहना कर कुरान की समझ को दूसरी किताबों से और दूर कर लिया।

हक़ीकत ये है कि निराकार एबसोलूट अल्लाह है, उसकी मैनिफैस्ट ताक़त यानी परमात्मा यानी विष्णू यानी वजहुल्लाह है जिसे ईसाईयों ने होली स्प्रिट कहा लेकिन फिर ब्रहमा नामी दिव्यात्मा शक्ति से विभाजित हो कर क्रिएट हुई 7 दिव्यात्माओं यानी नूरानी रूहों को नहीं पहचान पाए जिनको अगर किसी इंसान की ओर भेज दिया जाता है तो पैग़म्बर यानी अवतार हो जाता है। ईसाईयों ने ग़लती ये की कि इसको ईसा पर ही खत्म कर दिया, हिन्दुओं ने कृष्ण को ही परमात्मा मान लिया और मुसलमानों ने रूह को ही नकार दिया, और मायनी में जिब्रील को लाकर बिठा दिया।

कुल 7 ही देवता हैं जिनमें एक देवी है, यही नूर हैं, यही रूह हैं, और विभिन्न इंसानी जिस्मों को आफिस बना कर हिदायत का काम करते हैं। गीता ने तो जब जब और तब तब के शब्द प्रयोग किए हैं। जब जब धर्म की समझ कम होती है और अधर्म बढ़ जाता है तब तब परमात्मा की ओर का कोई अवतार किसी मानव शरीर को आफिस बनाकर काम करता है। ईसाईयों ने जब ईसा तक ही अपने को सीमित कर लिया तो आने वाले समय में हिदायत के सारे दरवाज़े बंद कर दिये। हिन्दुओं ने सिर्फ भारत वर्ष में ही अवतारो ंको पहचाना जबकि परमात्मा की तो सारी धरती है और वो जब जब और तब तब कह कर बात कर रहा है।

कुरान के 21वें सूरह की आयत पेश करते हैंः

Quran.21.91

And she who guarded her chastity, so We breathed into her of Our Spirit, and We made her and her son a sign for the worlds.

उस पाकीज़ा खातून मरयम को भी याद करें जिसने अपनी इफफत यानी पाकीज़गी की हिफाज़त करी, फिर हमने अपनी रूह में से कुछ उसमें फूंक दी और हम ने उसे और उसके बेटे को जहान वालों के लिए निशानी बनाया।

ये आयत एकदम साफ तौर पर रूह का रोल बता रही है। मरयम के लिए बात हो रही है। इस आयत का सही अनुवाद करेंगे तो आयत कह रही है ‘रूह में से कुछ उस पर डाल दिया’।

समझने की बात ये है कि रूह इंसान के पैदा होने के बाद उम्र के किसी हिस्से में भी उसमें दाखिल हो सकती है और मां के पेट में पल रहे बच्चे में भी डाली जा सकती है जैसा कि मरयम के बारे में बताया जा रहा है। ¬¬¬¬

Quran.[Surah Al-Maida].5.110

(Remember the Day) when Allah will say (on the Day of Resurrection). “O ‘Iesa (Jesus), son of Maryam (Mary)! Remember My Favour to you and to your mother when I supported you with Ruh-ul-Qudus [(Pure Spirit); wrongly mentioned Jibrael (Gabriel) in brackets]

So that you spoke to the people in the cradle and in maturity; and (remember) when I taught you writing and wisdom [Al-Hikmah (the power of understanding)], the Taurait (Torah), and the Injeel (Gospel); and when you designed from clay (what was) the figure of a bird, by My Permission, and you breathed into it, and it is came a bird by My permission, and you healed those born blind, and the lepers by My Permission, and when you brought forth the dead by My Permission; and when I restrained the Children of Israel from you (when they resolved to kill you) since you came unto them with clear proofs, and the disbelivers among them said: “This is nothing but evident magic.”

यानी ईसा जो भी मोजिज़े यानी चमत्कार कर रहे थे, जिसमें कोढ़ी मरीज़ों को ठीक करना था, मरे हुए को ज़िंदा करना था और अपने बचपन में मिट्टी की चिड़िया बना कर उस पर फूंक कर उड़ा देना था, और वो चिड़िया बन कर उड़ जाती थी, खुदा कह रहा है कि ये सब उसी अल्लाह की तरफ से था और ये अल्लाह की तरफ से अहसान है जिसे और लोग उस वक्त जादू कहा करते थे।

आप ने देखा कि सिर्फ हिन्दुओं की किताबों में रूह यानी आत्मा की बात नहीं हुई बल्कि कुरान खुद रूह की बात कर रहा है। रूह जब काम कर रही है तब तो ईसा मोजिज़े यानी चमत्कार दिखा रहे हैं, उनको तमाम किताबों का ज्ञान हो रहा है। मौहम्मद के लिए भी कुरान ने साफ साफ इसी राज़ पर से पर्दा उठाने की कोशिश की लेकिन मुसलमान समझ भी नहीं पाए। 

Book of Revelation जो बाईबल का आखिरी चैप्टर है, उसमें कहा जाता है कि 7 स्प्रिटस यानी रूहें थीं खुदा की ओर की जो आदम के साथ ज़मीन पर आईं। ये 7 दुनिया में थीं और विभिन्न इलाक़ों में मानव शरीर को आफिस के रूप में प्रयोग करके हिदायत का काम अंजाम दे रही थीं, लेकिन एक ज़माना आने वाला था जब ये 7 की 7 एक ही इलाक़े में नवजात बच्चों की तरह मानव शरीर को आफिस बना लें तो इस ज़माने की पेशिंगोई करते हुए ईसा कह रहे थे कि the spirit of truth is about to come. सात की सात मिलकर spirit of truth बनती हैं। जब हम सनातन किताबों से इस कानसैप्ट को देखेंगे तो बात और साफ हो जाएगी।

Quran.17.104

And We said after him (Pharaoh) to the Children of Israel, “Dwell (in) the land, then when (the) promise (of) the Hereafter comes to pass, We will bring you (as) a mixed crowd.”

और अगली आयत में कहा जा रहा हैः

Quran.17.105

And with the truth We sent it (Rooh) down, and with the truth it (Rooh) descended. And not We sent you except (as) a bearer of glad tidings and a warner.

ईसा कह रहे थे कि सच्चाई की रूह आने को है और ईसा की पेशिंगोई को कन्फर्म करते हुए कुरान कह रहा है हमने रूह को सच्चाई के साथ नीचे भेजा। आप को समझना होगा कि पैग़म्बर मौहम्मद पर वही नहीं उतरी कि जैसे जिब्रील किसी बड़े से ख़्वान में आयतों को सजा कर लाते हों। बल्कि उन पर भी रूह ही थी जो भेजी गई थी।

और देखिए मूसा क्या कह रहे हैं अपनी क़ौम सेः

Acts 3, 22-25 [Deuteromy 18.15-19]

The Lord God will raise up a prophet for you from among yourselves as he raised me, you shall listen to everything he says to you, and anyone who refuses to listen to the prophet must be extirpated from Israel.” And so said all the prophets, from Samuel onwards, with one voice they all predicted these days. You are the heirs of the prophets; you are within the covenant which God made with your fathers, when he said to Abraham, “And in your offspring all the families on earth shall find blessings.”

मूसा कह रहे  हैं कि अल्लाह तुम में एक और नबी भेजेगा जैसे मुझे भेजा। और कह रहे हैं कि तुम पर लाज़िम है कि उसकी बात सुनो और जो कोई उनकी वाणी सुनने से इंकार करे उसको इस्रायल से निकाल दिया जाना चाहिए। मज़ीद कहा जा रहा है कि केवल वो ही नहीं, उनके पहले, सैमुएल से लेकर तमाम नबियों ने एक आवाज़ में भविष्यवाणी की है उन दिनों की जब वो आएंगे। ज़रा सोचिए, जब सब नबी भविष्यवाणी कर रहे थे तो क्या वेद के ऋषि आने वाले दिनों की पहचान नहीं बता रहे होंगे जब वो आएंगे, जैसा आप आगे देखेंगे।

आगे कहा जा रहा है कि खुदा ने इब्राहीम से वादा किया था कि उनकी औलादों में आने वालों से तमाम दुनिया के लोगों को नेयमतें/बेहतरी मिलती रहेंगी।

The Book of John में ईसा पैराक्रलीट के आने की बात कर रहे हैं, कि जब वो आएगा तो वो मिशन को पूरा करेगा जो पूरा का पूरा सत्य पर आधारित होगा। और कुछ भी वार्तालाप नहीं करेगा सिवाय इसके जो उनका रब उनसे बोलेगा।

Jesus explains in John 16:13 that the Paraclete [The Helper or the Spirit of Truth] "will not speak on his own authority, but will speak whatever he hears, and will tell you what is to come".

आप ने देखा कि बार बार ये  बात हो रही है कि आने वाला अपने मन से कुछ नहीं बोलेगा, सिवाय उसके कि जो उनका रब उनसे कहेगा और पूरी सृृष्टि में यदि किसी के लिए ये बोला गया कि वो कुछ कलाम नहीं करता सिवाय उसके कि जो उनकी रब की ओर से हो, तो वो मौहम्मद के लिए।

Quran.[Surah An-Najm].53.3-4

"Nor does he speak from [his own] inclination. It is not but a revelation revealed,"

कुरान भी यही बात ईसा के लिए कह रहा हैः

The son of Mary said I have been certainly the Messenger of God confirming the revelation of previous scriptures and giving you glad tidings of a messenger Ahmed.

यहां कहा जा रहा है कि मरयम के बेटे यानी ईसा ने आने वाले समय में अहमद नाम के किसी रसूल के आने की बात की। लेकिन ईसाई स्क्रिपचर्स में हमें ऐसा कुछ देखने को नहीं मिलता सिवाय इसके कि हम Gospel of Barnabas पढ़ें। ईसाई इस गोस्पेल को आमतौर पर नकार देते हैं लेकिन उसमें ये पेशिंगोई मौजूद है कि ईसा ने कहा कि आने वाले वक्त में कोई मैसेंजर आएगा जिसका नाम अहमद होगा।

अगर ईसा अपने लिए कह रहे हैं कि अल्लाह का रसूल हूं और वही शब्द आने वाले के लिए भी प्रयोग कर रहे हैं तो हमें समझना होगा कि ईसा खुदा के बेटे नहीं हो सकते बल्कि जिस सिस्टम से खुदा की ओर से ईसा रसूल बन कर आए थे उसी सिस्टम से उनके पहले भी रसूल आ रहे थे और बाद में भी किसी को आना था।

कृष्ण भी कह रहे हैं कि जब जब धर्म मिट जाता है और अधर्म फैल जाता है तब तब परमात्मा की ओर का कोई अवतार आता है ताकि धर्म के उसूलों को फिर से स्थापित करे और अधर्मियों का नाश करे। कृष्ण भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि उसी सिस्टम से उनसे पहले भी अवतार आते रहे और उनके बाद भी अवतार आएंगे। यहां भी आवश्यक हो जाता है कि हम उस सिस्टम को समझें जिसके अनुसार अवतार आ रहे हैं और कृष्ण कैसे अवतार थे, इसको भी समझें।

एक और खास बात! अहमद का नाम तो इस समय जो बाईबल हमारे पास है उसमें नहीं मौजूद लेकिन एलया का नाम आज भी बाईबल के चारों वर्ज़न्स में देखने को मिल जाएगा। ईसा जब सूली पर चढ़ाए गये तो उन्होंने एलया को याद करते हुए कहा कि हे एलया, इस समय तुम ने मुझे क्यों फरामोश कर दिया।

यदि आप मेरी किताब ‘वन गाड, वन रिलीजन’ का भाग 2 पढ़ेंगे तो आप उसमें पाएंगे कि पहले के कौन कौन से नबियों ने एलया की भविष्यवाणी की और एलया दरअस्ल कौन है।

इस को समझाने के लिए ईसाई कहते हैं कि एलया किसी पहले के पैग़म्बर का नाम था। मैं ये सवाल करता हूं कि यदि एलया किसी पहले आए पैग़म्बर का नाम था, जिसको ईसा याद कर रहे थे, तो ईसा तो सबसे बड़े पैग़म्बर थे, तुम्हारे अनुसार स्वयं खुदा के बेटे थे। फिर उन्हें किसी आखिरी समय में, सूली पर चढ़ाए जाने के बाद, किसी पहले गुज़रे पैग़म्बर को याद करने की क्या ज़रूरत थी। ईसा के शब्द तो ऐसा बता रहे हैं जैसे एलया ही अब तक उनकी मदद किया करते थे।

इसमें दो राय नहीं कि पहले एक पैग़म्बर गुज़रे हैं जिनका नाम एलया था। लेकिन हमको समझना होगा कि उनका नाम एलया ऐसे ही रखा गया होगा जैसे आज अनेक घरों में राम और सीता नाम रखे जाते हैं।

स्कालर्स ये भी कहते हैं कि एलया किसी शहर का नाम है। ये लोग बताएं कि क्या ईसा सूली पर चढ़ाए जाते वक्त किसी शहर को याद कर रहे थे। ईसा के शब्दों से ज़ाहिर है कि वो शहर की बात नहीं कर रहे।

जब कोई जवाब नहीं बन पड़ता तो कुछ कमेंटेटर्स कह देते हैं कि एलया खुदा के लिए प्रयोग हुआ है। उनसे सवाल है कि दिखाएं कि कहीं और ईसा ने खुदा के लिए एलया का शब्द प्रयोग किया हो। जबकि मैं बताता आ रहा हूं कि तमाम इतिहास में एलया किस शख्सियत के लिए प्रयोग होता आया है।

अब आईए देखते हैं कि इस्लामिक स्किपचर्स में रूह को कैसे ब्यान किया गया है। सूरह ग़फीर की आयत देखिएः

Quran. [Surah Ghafir].40.15

Possessor of the Highest Ranks, Owner (of) the Throne; He sends the Special Spirit of His Command upon whom He wills of His slaves, to warn (of the) Day (of) the Judgement.

दरजात को बुलंद करने वाला, मालिके अर्श अपने बन्दों में से जिस पर चाहता है रूह अपने हुक्म से भेज देता है।

अल-काफी एक किताब है जिसको कुछ लोग बहुत मौअत्बर समझते हैं। अल-काफी की हदीस नम्बर 714 देखिए जिसमें कुरान में 56वें सूरह - सूरह वाक़ेया - की 7 से 11 आयत पर बात करते हुए इमाम जाफर सादिक़ कहते हैंः

He [Allah] put in them the five arwah [plural of rooh]; He sustained them with Rooh-ul-Qudus [Pure Spirit]

रूहुल कुदुस को पाक रूह कहा गया है। इस हदीस में इमाम बताते हैं कि ये पाक रूह रसूल के जिस्म को अपना आफिस बनाए थी और उनके जाने के बाद वापिस नहीं गई बल्कि और इमामों के जिस्म मेें काम कर रही है।

इस हदीस से वो सब कुछ साबित हो जाता है जो हम अब तक बताते आए हैं। अवतार होता ही वो है जिसके शरीर में परमात्मा यानी वजहुल्लाह की बनाई गई दिव्यात्मा शक्ति यानी ब्रहमा का कोई अंश अपने आफिस के रूप में काम कर रहा होता है। उपनिषद आदि में साफ लिखा है कि ये दिव्यात्मा पाक तत्वों से बनाई गई।

इसी प्रकार हदीस नम्बर 715 में इमाम मौहम्मद बाक़र कहते हैं कि इसी रूह के कारण अर्श के नीचे और ज़मीन की तहों तक जो कुछ है उस सब का ज्ञान उन्हें हो जाता है। अर्श वो मक़ाम है जहां कुर्सी है यानी जहां विष्णू यानी वजहुल्लाह यानी मैनिफैस्ट सैल्फ का सिंहासन है। क्योंकि विष्णू यानी वजहुल्लाह यानी मैनिफैस्ट सैल्फ के बाद दिव्यात्मा शक्ति क्रिएट हुई जिससे दिव्यात्माएं यानी नूरानी रूहें बनीं जो अवतारों के जिस्मों को आफिस के रूप में प्रयोग करती हैं हमें हिदायत देने के लिए, इसलिए इमाम कह रहे हैं कि इस रूह के कारण अर्श के नीचे की तमाम बातों का ज्ञान इमाम को हो जाता है। लेकिन अर्श के परे का नहीं होता, क्योंकि दिव्यात्माओं यानी नूरानी रूहों का क्रिएशन विष्णू यानी वजहुल्लाह यानी मैनिफैस्ट सैल्फ के बाद है, जिसका अर्श और कुर्सी है।

हदीस नम्बर 716 में इमाम जाफर सादिक़ से जब पूछा गया कि उनको कैसे ज्ञान हो जाता है कि सारी दुनिया में क्या हो रहा है जबकि वो अपने कमरे में पर्दे के पीछे बैठे हुए हैं तो इमाम जवाब देते हैं कि रूहुल कुदस के कारण जिसकी वजह से पैग़म्बर मौहम्मद को नुबूवत मिली और जब पैग़म्बर चले गये तो ये पाक रूह इमामों के शरीर में स्थानांत्रित कर दी जाती है। इमाम कहते हैं कि ये पाक रूह न तो सोती है और न ही किसी ओर से ध्यान भटकता है/भूलती है, न गुमराह हो सकती है और न ही ग़लत कर सकती है। इमाम कहते हैं कि रसूल और इमामों को तमाम सृष्टि का ज्ञान इसी पाक रूह के कारण मिलता है।

हदीस नम्बर 717 में आठवें अहललबैत जाफर सादिक़ कहते हैं रूह क़ादिरे मुतलक़ अल्लाह की खिलकत है, ये जिब्रील और मीकाईल फरिश्तों से ज़्यादा बड़ा मक़ाम रखती है, ये पहले अल्लाह के रसूल के साथ थी, इसने उनका मार्गदर्शन किया, और अब उनके बाद ये इमामों के साथ है।

कुरान कह रहा है कि रसूल अपनी मर्ज़ी से कुछ नहीं बोलते। यानी जब वो रोज़ के काम कर रहे थे, मस्जिद में बैठे हों, किसी ने आकर कोई सवाल पूछा, उसका जवाब दिया, किसी और ने सवाल पूछा, उसका जवाब दिया, तो क्या जिब्रील हर बार आसमान से जवाब लेकर आते थे और कान में फुसफुसा कर बताते थे। ये कितना हास्यप्रद है! हक़ीक़त ये है कि वो दिव्यात्मा इतनी ताक़तवर थी कि उसका कनैक्शन सीधे परमात्मा से जुड़ा हुआ था, जैसा कि गीता में हम देखते हैं कि कैसे कृष्ण के मुख से परमात्मा बात कर रहा था।

उस वक्त हमारी सोच इतनी विकसित नहीं हुई थी कि बीच में किसी मीडियम के बिना हम समझ सकते कि अल्लाह की ओर का संदेश मौहम्मद तक कैसे पहुंचा, इसलिए हमने बीच में जिब्रील को बिठा दिया। अब आप को समझना होगा कि ब्रहमा नामी दिव्यात्मा शक्ति से बंट कर बनी 7 दिव्यात्माओं यानी नूरानी रूहों में से एक रूह थी जो मौहम्मद के जिस्म को आफिस बनाए थी, और काम कर रही थी।

हदीस नम्बर 719 देखिएः

In Hadees 719, from Al-Kafi Abu Basir says that he asked Jafar al-Sadiq about the words of Allah, to whom belong Might and Majesty: They will question thee concerning the Spirit. Say: ‘The Spirit is of the bidding of my Lord’ [Quran. (Chapter Al-Isra).17.85] Imam said: ‘(It is) a created thing greater than Gabriel and Mikail; it was with the Messenger of Allah, it is with the Imams, and it is from the Kingdom (al-Malakut).’

साफ कह रहे हैं कि अल्लाह की ओर से रूह है, जो अल्लाह की ही बनाई गई है लेकिन जिब्रील और मीकाईल से बड़े लेवेल की मख़लूक़ है, पहले पैग़म्बर मौहम्मद के जिस्म में काम कर रही थी और अब इमामों के जिस्म से काम कर रही है। और कह रहे हैं कि ये उसकी खुदाई में से है; मलकूत से है। ये सबसे अफज़ल फरिश्ते जिब्रील से भी बड़ा रूतबा रखती है, इसका सुबूत मेराज में देखने को मिलता है जब सिदरतुल मुन्तहा के आगे जिब्रील ने जाने से मना कर दिया, ये कहते हुए कि इसके आगे मैं अगर गया तो जल कर राख जाउंगा, लेकिन पैग़म्बर मौहम्मद वहां से भी आगे बढ़ते चले गये इस हद तक कि उनके रब और उनमें दो कमान या उससे भी कम का फासला रह गया।

Spirit of Truth जिस की बात ईसा कर रहे थे, इससे साबित हो जाता है कि वो मलकूत से है और इसी दिव्यात्मा की बात ईसा भी कर रहे थे। ईसा बार बार Kingdom of God के आने की बात भी कर रहे थे। साफ है कि जिस शरीर में खुदा की ओर की ये रूह काम कर रही होगी, जब सारी दुनिया पर उसकी हुकूमत होगी तो वही Kingdom of God कहलाएगी। आलमे मलकूत जिस तरह खुदा की खुदाई है वो इस दुनिया में भी होगी; ऐसा वक़्त आने की वो पेशिंगोई कर रहे हैं।

मैं बताता आया हूं कि एक रूह से 7 रूहें निकली थीं और वो 7 मिलकर Spirit of Truth बनती हैं। यही कारण है कि आज जिस अवतार का हमें इंतेज़ार है उसे बक़ियातुल्लाह कहते हैं यानी अल्लाह - की रूह - में का बाक़ी अंश।

हदीस नम्बर 721 में अबू हम्ज़ा पैगम्बर मौहम्मद के बारे में सवाल कर रहे हैं इमाम जाफर सादिक़ से और उसका जवाब देते हुए इमाम कहते हैंः

Indeed he was in a state in which he did not know what was book nor faith until Allah Most High sent forth His spirit. And because He revealed it to him, he taught knowledge and understanding through it. This is the spirit which Allah Most High gives to whom He wishes, and when He gives it to His slave, He teaches him understanding.

कुरान की आयत हमने पहले दिखाई थी कि अल्लाह जिस पर चाहता है रूह को भेज देता है तो वो व्यक्ति बतौर अवतार तमाम काम करने लग जाता है और यहां इमाम जाफर सादिक़ कह रहे हैं कि वो अपने जिस बन्दे पर चाहता है इस स्प्रिट को भेज देता है और इससे उसको दानाई अता कर देता है।

वेद कह रहे हैं कि तप प्रभाव और देवात्मा शक्ति के कारण ऋषियों के मस्तिष्क में ज्ञान अवतरित होता था। इससे पता चलता है कि देवात्मा शक्ति से जिन 7 दिव्यात्माओं के बनने की बात उपनिषद कर रहे हैं वो ही ज़िम्मेदार थीं ऋषियों द्वारा बताए गये वेदिक भजनों का।

मुसलमानों में बहुत से लोग ये ग़लतफहमी पहने बैठे हैं कि रूह का मतलब जिब्रील। हम बताते आए हैं कि सूरह इन्ना अंज़लना में जहां पर रूह और मलाएका की बात हुई, वहां ये रूह का अनुवाद जिब्रील कर देते हैं और मायनी ये हो जाते हैं कि अल्लाह के हुक्म से मलाएका और जिब्रील सारे हुक्म बजा लाते हैं। अल काफी की हदीस नम्बर 722 में अली बताते हैं कि ये गलत समझ पर आधारित सोच है। अफसोस कि अली ने ऐसा बताया लेकिन आज तक कुरान के अनेक अनुवादों में रूह के मायनी जिब्रील ही समझाए जा रहे हैं।

In the Hadees (Al Kafi) that we present here (Tradition No. 722), Imam Ali even refutes the belief that Gabriel is ‘Rooh’. “A man came to Ameer-ul-Momineen (Ali) and asked him about the Spirit: ‘Is it not Gabriel?’ Ameer-ul-Momineen said to him: ‘Jibreel (Gabriel) is one of the angels, and the Spirit is not Jibreel.’ – and he repeated this to the man – then he (the man) said to him: ‘You have said something very important; no one claims that the Spirit is not Jibreel. Ameer-ul-Momineen said to him: ‘You are wrongly guided, and recount from the people of misguidance. Allah Most High has said to His Prophet: Allah’s command comes; see not to hasten it. Glory be to Him! High be the exalted above that they associate with Him! He sends down the angels with the Spirit [Quran (Surah an-Nahl). 16.1-2), and the Spirit is not the angels, may the blessings of Allah be upon them.’”

अली ने एकदम साफ अल्फाज़ में कहा कि रूह फरिश्ता नहीं है बल्कि उससे बड़ा मक़ाम है। जब अल्लाह तप से पाक किए गये किसी इंसानी जिस्म को ज़मीन पर अपने आफिस के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है तो इस दिव्यात्मा शक्ति के किसी अंश को उस इंसान के जिस्म में भेज देता है और वो हम को हक़ और बातिल की शिक्षा देना प्रारंभ कर देता है।

एथेनागोरस एक फिलासफर गुज़रा है, मुमकिन है नबी भी हो, उसने कहा थाः

Athenagoras says:

While entranced and deprived of their natural powers of reason by the influence of the Divine Spirit, they uttered that which was wrought in them, the spirit using the body as its instrument as a flute-player might blow a flute.

अवतारों/रसूलों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब वो डिवाईन स्प्रिट के प्रभाव में होते थे तो स्प्रिट उनको ऐसे इस्तेमाल करती थी जैसे कोई बांसुरी बजाने वाला बांसुरी बजाता है। यानी उनके मुख से परमात्मा के शब्द निकलते चले जाते थे।

अब आप समझे क्यों अर्जुन बड़ी देर तक नहीं समझ पाए कि उनके सामने कृष्ण बात कर रहे हैं उनका परमात्मा से कोई सम्बंध है। अब आप ये भी समझिए कि क्यों महाभारत के अंत में कृष्ण कहते हैं कि उस समय मैं योग में था; अब मैं योग में नहीं हूं।

कुरान का सूरह हदीद देखिए जो कह रहा है कि रसूल भेजा हुआ होता है; ज़मीन पर जो जिस्म पैदा हुआ वो रसूल नहीं बल्कि उसके जिस्म को जिस रूह ने आफिस बनाया, वो रसूल होता है।

Quran. Surah Hadid.25

Verily, We sent Our messengers with clear proofs, and revealed with them the book and the scale, that mankind may observe right measure (establish themselves in justice).

जब रूह भेजी जाती है जो उस व्यक्ति का जिस्म, जिस पर रूह भेजी गई, परमात्मा का आफिस हो जाता है जिसके माध्यम से परमात्मा इंसानों तक अपना पैग़ाम पहुंचाता है।