Thursday, 17 September 2026

आसमान की बादशाही - Part 4

 आसमान की बादशाही - Part 4

क़ुरआन की तरह ईसा भी हर आदमी को अपनी अक़ल इस्तेमाल करने की नसीहत दे रहे हैं। उन्हें अपने से ज़्यादा अपने आसमानी बाप को पहचानने और उनकी बातों पर अमल करने को कह रहे है। ईसा का नाम लेने से, उनके नाम पर मोजिज़े दिखाने से, और उनके नाम से नुबूवत करने से यानी उनकी चर्च में पादरी वग़ैरा का रोल अदा करने से  कोई फाएदा नहीं अगर आसमानी बाप को वक़्त रहते पहचाना।

यही बात मत्ती 8:11-12 में कह रहे हैं:

और मैं तुम से कहता हूँ कि बहुतेरे पूरब और पश्चिम से आकर अब्राहम और इज़हाक़ और याक़ूब के साथ आसमान की बादशाही की ज़ियाफत में शरीक होंगे। मगर बादशाही के बेटे बाहर अँधेरे में डाले जायेंगे। वहाँ रोना और दाँत पीसना होगा।

आप ने देखा कि इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब की औलाद जो ईसा को मानती है पछताएगी क्योंकि उसने आसमानी बाप और उसकी बादशाही का इंकार किया। इस से भी साबित है कि ईसा का आसमानी बादशाही में रोल नहीं रहेगा बावजूद इसके कि उनको उनके आसमानी बाप ने हवा और पानी पर क़ुदरत दी थी और रूहें उनके कहने से जिस्म से बाहर चली जाती थीं और वापिस जिस्म में दाखिल हो जाती थीं।

मत्ती 19:28 में जब शागिरदों ने पूछा कि हमें जो सब छोड़ कर तुम्हारे पीछे हो लिए क्या अज्र मिलेगा तो ईसा ने क्हाः

मैं तुम से सच कहता हूँ कि जब इब्ने आदम नई पैदाईश में अपने जलाल के तख़्त पर बैठेगा तो तुम भी जो मेरे पीछे हो लिए हो बारह तख़्तों पर बैठ कर इस्राईल के बारह क़बीलों का इंसाफ करोगे।

ईसा साफ लफजों में कह रहे हैं कि जब नई पैदाईश में इब्ने आदम जलाल के तख़्त पर बैठ कर ज़ाहिर होगा तो तुम भी जो मेरे मानने वाले हो बारह तख़्तों पर बैठ कर इब्ने आदम के पीछे हो लोगे। लफज़ नई पैदाईशसे ज़ाहिर है कि ये हमारे ज़माने की बात हो रही है। यहाँ इब्ने आदम से मुराद ईसा नहीं बल्कि वो होगा जिसको ज़मीन पर हमारे गुनाह माफ करने का इख़्तेयार होगा। किताब “Muslims & The Straight Path” में क़ुरआन से साबित है कि गुनाह माफ करने का इख़्तेयार अल्लाह ने नूर से बनी उन हस्तियों को दे रखा है जिन्हें उस ने पाक बनाया और जिनके लिए उसने सारी कायनात को ख़ल्क़ किया। इन्ही को कुरआन ने जज कह कर मुख़ातिब किया और अल्लाह को जजों का जज कहा। रसूल की कई हदीसें मौजूद हैं जिनके मुताबिक़ यह जन्नत के सरदार हैं और रोज़े जज़ा के मालिक। अगर ईसा ने गुनाह माफ करने की बात की तो सिर्फ इसलिए कि सब जान लें कि इब्ने आदम, जिसको आने वाले वक़्त में आना था, को गुनाह माफ करने का इख़्तेयार है। देखिए मत्ती 9:2-7:

और देखो लोग एक मफलूज को चारपाई पर पड़ा हुआ उस के पास लाए। यसूअ ने उनका ईमान देख कर मफलूज से क्हा बेटा ख़ातिर जमा रख तेरे गुनाह माफ हुए। और देखो बाज़ फक़ीहों ने अपने दिल में क्हा ये कुफ्र बकता है। यसूअ ने उनके ख़्याल मालूम करके क्हा कि तुम क्यों अपने दिलों में बुरे ख्याल लाते हो? आसान क्या है-ंये कहना कि तेरे गुनाह माफ हुए या ये कहना कि उठ और चल फिर? लेकिन इसलिए कि तुम जान लो कि इब्ने आदम को ज़मीन पर गुनाह माफ करने का इख़्तेयार है - उस ने मफलूज से क्हा - उठ। अपनी चारपाई उठा और अपने घर चले जा। वो उठ कर अपने घर चला गया।

ऐसा लगता है कि ईसा का मक़सद ही आने वाली बादशाही के बारे में लोगों को जानकारी देना था। वक़्त बवक़्त मोजिज़े अंजाम देकर वो दिखाना चाहते थे कि आने वाली बादशाही में जो शख़्सियतें नूरे ख़ुदा या रूहे ख़ुदा के तौर पर पेश होंगी उनको कितना इख़्तेयार होगा। देखिए मत्ती 9:35:

और यसूअ सब शहरों और गाँव में फिरता रहा और उनके इबादत खानों में तालीम देता और बादशाही की खुशखबरी की मुनादी करता और हर तरह की बीमारी और हर तरह की कमज़ोरी दूर करता रहा।

ये तो साफ है कि ईसा की आसमान की बादशाही की पेशिंगोई उनके बाद के लिए थी। यही वजह है कि अपनी तालीम को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने जो 12 रसूल बनाए उनको भी यही तालीम देने को क्हा। ईसा के अल्फाज़ साफ बताते हैं कि उन्होंने ग़ैर क़ौमों के पास जाने से मना किया  और आसमान की बादशाही की तालीम सिर्फ बनी इस्राईल को देने को क्हा। अफसोस कि रसूलों के बाद के दौर में उनकी पेशिंगोईयों को मज़हब की शक्ल दे दी गई और तालीमात को ग़ैर क़ौमों तक पहुँचाया गया जो आज तक जारी है। देखिए मत्ती 10:5-7:

इन बारह को यसूअ ने भेजा और उन को हुक्म दे कर क्हाः गै़र क़ौमों की तरफ जाना और साम्रियों के किसी शहर में दाखि़ल होना। बल्कि इस्राईल के घराने की खोई हुई भेड़ों के पास जाना। और चलते चलते ये मुनादी करना कि आसमान की बादशाही नज़दीक गई है।

इस से ज़ाहिर है कि ईसा के बज़ाहिर सलेब पर चढ़ाए जाने तक आसमान की बादशाही नहीं आई थी और उसे किसी आने वाले ज़माने में आना था जो नज़दीक था।

आप पढ़ चुके हैं कि हिदायत और सही रास्ते की तालीम नूर का फरीज़ा है। जो नूर है वही रूह है। इसी वजह से ईसा मत्ती 10:19-20 में अपने 12 रसूलों से कहते हैं:

लेकिन जब वो तुम को पकड़वायें तो फिक्र करना कि हम किस तरह कहें या क्या कहें क्योंकि जो कुछ कहना होगा उसी घड़ी तुम को बताया जाएगा। क्योंकि बोलने वाले तुम नहीं बल्कि तुम्हारे बाप का रूह है जो तुम में बोलता है।

यही बाप की रूह कृष्ण के मुँह से गीता में कलाम कर रही है और यही हर पैग़म्बर के मुँह से खि़ताब करती रही। इसी ने कुरआन नाज़िल किया जो आप आयतों के बदलते तर्ज़ से देख चुके हैं।

आप ने देखा कि ईसा ने अपने 12 रसूलों को सिर्फ बनी इस्राईल के बीच जाने की हिदायत दी थी। वो जानते थे कि इब्ने आदम का आना ज़्यादा दूर नहीं जिस के आने से आसमानी बादशाही की राहें बिछेंगी। इब्ने आदम मौहम्मद की शक्ल में 500 साल के अन्दर आने वाला था। यही वजह है कि ईसा कहते हैं कि तुम इस्राईल के सब शहरों में फिर चुकोगे कि इब्ने आदम जाएगा। देखिए मत्ती 10:22-23:

और मेरे नाम के बाएस सब लोग तुम से अदावत रखेंगे मगर जो आखि़र तक बरदाश्त करेगा वही निजात पाएगा। लेकिन जब तुम को एक शहर में सतायें तो दूसरे को भाग जाओ क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूँ कि तुम इस्राईल के सब शहरों में फिर चुकोगे कि इब्ने आदम जाएगा।

क्या ये साफ नहीं है कि इब्ने आदम की आमद जल्दी ही होनी थी और यहाँ ईसा के आखि़री ज़माने में दुबारे आना मुराद नहीं था। मत्ती 10:29-33 में भी ईसा ने साफ क्हा है कि लोगों का और उनका बाप एक है जो आसमान पर है। फिर क्यों ईसाईयों ने ईसा को ख़ुदा का बेटा क्हा, समझ से बाहर है। देखिए कैसे तुम्हारा बाप और मेरा बाप कह कर खिताब हो रहा हैः

क्या पैसे की दो चिड़ियाँ नहीं बिकतीं? और उन में से एक भी तुम्हारे बाप की मर्ज़ी के बग़ैर ज़मीन पर नहीं गिर सकती। बल्कि तुम्हारे सिर के बाल भी सब गिने हुए हैं। पस जो कोई आदमियों के सामने मेरा इक़रार करेगा मैं भी अपने बाप के सामने जो आसमान पर है उस का इक़रार करूँगा। मगर जो कोई आदमियों के सामने मेरा इंकार करेगा मैं भी अपने बाप के सामने जो आसमान पर है उसका इंकार करूँगा।

ईसाईयों के ईसा को खुदा का बेटा कहने की एक ही वजह समझ में आती है। वो ये कि ज़ुलमत की ताक़त जानती थी की नूरे ख़ुदा यानी spirit of God के ज़मीन पर आने का वक़्त नज़दीक है। इन 500 सालों के कम वक़फे में उसे बनी इस्राईल को इस क़द्र सीधे रास्ते से दूर करना था कि वो नूरे मौहम्मद के दुनिया में आने पर किसी भी हालत में उन्हें पहचान पाएँ। यही वजह है कि यसूअ की तालीमात को बदल दिया गया ताकि उनके मानने वाले उन्हें ख़ुदा का बेटा मान लें और किसी भी आने वाले से उन्हें अफज़ल मानें। आप ने मुबाहिला का वाक़ेया पढ़ा होगा! ईसाई पादरियों का वफ्द मौहम्मद की हर बात को मान गया लेकिन जब ईसा के ख़ुदा का बेटा होने की बात आई तो कुछ भी मानने से इंकार कर दिया। यहाँ तक कि क़ुरआन को कहना पड़ा कि ईसा को अल्लाह ने वैसे ही पैदा किया जैसे आदम को पैदा किया था; ईसा की तो कमज़कम माँ मरयम की शक्ल में मौजूद थीं, आदम की तो माँ थी बाप। लेकिन ईसाई पादरियों ने नहीं माना और क़ुरआन ने उन्हें मुबाहिला की दावत दी जिस में उनकी खुली शिकस्त हुई।

हम बता चुके हैं कि ज़ुलमत की ताक़त को भी ख़ुदा ने बेहद ताक़तवर बनाया है। जब ईसा ने जो नूर के नुमाईंदे थे वाज़ेह अल्फाज़ में कहा कि ख़ुदा की रूह बस आने को है तो ज़ुलमत की ताक़त ने ठान लिया कि वो दिन आने से पहले ही यसूअ के मानने वालों को इस क़द्र बहका देगी कि वो सीधे रास्ते को पहचान सकें। अगर ऐसा नहीं तो फिर क्या वजह हो सकती है कि इतनी सारी पेशिंगोईयों के बावजूद ईसाई सीधे रास्ते से भटक गए और ईसा को ख़ुदा का बेटा मानकर आसमान की बादशाही की पेशिंगोईयों को भुला दिया। क्या जवाब है ईसाईयों के पास इस बात का कि ईसा ने ख़ुद क्हा कि वो नबी हैं और भेजे गए हैं किसी ख़ास मक़सद के लिए। आप देख चुके हैं कि वो मक़सद इब्ने आदम के आने की और आसमान की बादशाही की ख़ुशख़बरी देने के अलावा कुछ नहीं था। देखिए मत्ती 10:40-41:

जो तुम को क़ुबूल करता है वो मुझे क़ुबूल करता है और जो मुझे क़ुबूल करता है वो मेरे भेजने वाले को क़ुबूल करता है। जो नबी के नाम से नबी को क़ुबूल करता है वो नबी का अज्र पाएगा और जो रास्तबाज़ के नाम से रास्तबाज़ को क़ुबूल करता है वो रास्तबाज़ का अज्र पाएगा।

क्या इस आयत में साफ नहीं हो रहा कि ईसा नबी हैं और उनका भेजने वाला भी नबी और वो आने वाले नबी के क़ुबूल करने की बात कर रहे हैं? ईसा भी रास्तबाज़ और भेजने वाला भी रास्तबाज़ और वो आने वाले रास्तबाज़ को कुबूल करने की ही पेशिंगोई कर रहे हैं।

आगे देखिए, ईसा की बातों से साफ है कि युहन्ना भी आसमान की बादशाही की ही पेशिंगोई कर रहे थे। ये भी साफ तौर पर कहते हैं कि एलया यानी अली जिस को आना था वो यही हंै जिन की बादशाही है। ईसा कह रहे हैं कि हम ने यानी युहन्ना और ईसा ने हर कोशिश करी कि तुम समझ जाओ यहाँ तक कि बाँसुरी बजाई लेकिन तुम नाचे यानी नहीं समझे। ये भी कह रहे हैं कि हर पैग़म्बर यही पेशिंगोई करता आया लेकिन लोगों ने तालीम को बदल दिया। हम ने मातम किया पर फिर भी तुम समझे और छाती पीटी। साफ है कि ज़ोर इस पर है कि एलया का बादशाही से कोई ताल्लुक़ है। वो ये भी कह रहे हैं कि इब्ने आदम यानी मौहम्मद खाता पीता आएगा यानी आम आदमियों की तरह आएगा। लोग उसे दुनियावी काम करते देखेंगे लेकिन नूरे ज़ाती की हिकमत सही साबित होगी और आखि़रकार जब लोग उसे पहचान लेंगे तो आसमान की बादशाही क़ायम होगी। मत्ती 11:12-19 देखिएः

और युहन्ना बपतिस्मा देने वाले के दिनों से अब तक आसमान की बादशाही पर ज़ोर होता रहा है और ज़ोरआवर उसे छीन लेते हैं। क्योंकि सब नबियों और तौरैत ने युहन्ना तक नुबूवत की। और चाहो तो मानो। एलया जो आने वाला था यही है। जिस के सुनने के कान हों वो सुन ले। पस इस ज़माने के लोगों को मैं किस से तशबीह दूँ? वो उन लड़कों की मानिंद हैं जो बाज़ारों में बैठे हुए अपने साथियों को पुकार कर कहते हैं। हम ने तुम्हारे लिए बांसुली बजाई और तुम नाचे। हम ने मातम किया और तुम ने छाती पीटी। क्योंकि युहन्ना खाता आया पीता और वो कहते हैं कि उस में बदरूह है। इब्ने आदम खाता पीता आया और वो कहते हैं देखो खाउ और शराबी आदमी। महसूल लेने वालों और गुनाहगारों का यार! मगर हिकमत अपने कामों से रास्त साबित हुई।

ईसाईयों ने इस जगह पर कहा है कि एलया जिसे आना था वो यही हैसे मुराद युहन्ना है। किसी और जगह पर एलया का लफ्ज़ आया तो क्हा कि इससे मुराद किसी बीते ज़माने के पैग़म्बर हैं। जब मरते वक्त ईसा की ज़बान पर एली का लफ्ज़ आया तो क्हा कि वो ख़ुदा को पुकार रहे थे। लेकिन हक़ीक़त ये है कि ईसा कह रहे हैं कि एलया जिस के आने की ख़ुशख़बरी युहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने दी थी वो नूरे अली है जो इंसानी जिस्म में आने को है और जिस की औलाद यानी मौहम्मद मेहदी के ज़रिए आसमान की बादशाही क़ायम होगी। तमाम रास्तबाज़ों को चाहिए कि नूर के इसी फर्द का इंतेज़ार करें और उसके साथ हो लें।

ईसा जिसे आसमानी बाप कह रहे हैं वो आसमान और ज़मीन का मालिक है। और ईसा अपने को बच्चा ज़ाहिर करते हुए शुक्र करते हैं कि इस बच्चे को बड़े बड़े अक़लमंदों पर फौक़ियत मिली। इसलिए कि आसमानी बाप को ऐसा करना पसन्द आया। देखिए मत्ती 11:25-27:

उस वक्त यसूअ ने कहा बाप आसमान और ज़मीन के खुदावंद मैं तेरी हम्द करता हूँ कि तूने ये बातें दानाओं और अक्लमंदों से छिपाईं और बच्चों पर ज़ाहिर कीं। हाँ बाप क्योंकि ऐसा तुझे पसन्द आया। मेरे बाप की तरफ से सब कुछ मुझे सौंपा गया और बेटे को नहीं जानता सिवा बाप के और कोई बाप को नहीं जानता सिवा बेटे और उस के जिस पर बेटा उसे ज़ाहिर करना चाहे।

ईसा साफ और खुले अल्फाज़ में कहने की जगह मिसालों में अपनी बात को कहते हैं। मिसालों में बात कहने की वजह ब्यान करते हुए वो तीन तरह के लोगों की बात करते हैं: एक वो जो क्या कहा जा रहा है उसे समझ ही नहीं पाएँगे, एक वो जो समझ तो जाएँगे लेकिन अपने मफाद की ख़ातिर भुला देंगे या बदल देंगे और एक वो जो उसे समझ कर क़ुबूल करेंगे। ये भी कह रहे हैं कि आसमान की बादशाही बहुत बड़ा भेद है जो सब की समझ में नहीं आएगा। उपनिषद भी बार बार इस को सब से बड़ा राज़ कह रहा है। ज़ुलमत की ताक़त को शरीरकह कर मुख़ातिब करते हैं जिस की वजह से कलाम समझ में नहीं आता और जो कलाम को बदल देने  में माहिर है। आप देख रहे हैं कैसे अनगिनत हिदायत करने वालों के आने के बावजूद इस ताक़त ने बार बार कलाम को बदल दिया और इंसान को गुमराही में डाल दिया। देखिए मत्ती 13:10-23:

शागिरदों ने पास आकर उससे क्हा तू उनसे तमसीलों में क्यों बातें करता है? उसने जवाब में उनसे क्हा इसलिए कि तुम को आसमान की बादशाही के भेदों की समझ दी गई है मगर उन को नहीं दी गई। क्योंकि जिस के पास है उसे दिया जाएगा और उसके पास ज्यादा हो जाएगा और जिस के पास नहीं है उस से वो भी ले लिया जाएगा जो उस के पास है। मैं उनसे तमसीलों में इसलिए बातें करता हूँ कि वो देखते हुए नहीं देखते और सुनते हुए नहीं सुनते और नहीं समझते। और उनके हक़ में यसीयाह की ये पेशिंगोई पूरी होती है कि

तुम कानों से सुनोगे पर हरगिज़ समझोगे

और आँखों से देखोगे पर हरगिज़ मालूम करोगे

क्योंकि इस उम्मत के दिल पर चर्बी छा गई है

और वो कानों से ऊँचा सुनते हैं

और उन्होंने अपनी आँखें बन्द कर ली हैं

तो ऐसा हो कि आँखों से मालूम करें

और कानों से सुनें

और दिल से समझें

और रूजूअ लाएँ

और मैं उन को शिफा बखशूँ।

लेकिन मुबारक हैं तुम्हारी आँखें इसलिए कि वो देखती हैं और तुम्हारे कान इस लिए कि वो सुनते हैं। क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूँ कि बहुत से नबियों और रास्तबाज़ों को आरज़ू थी कि जो कुछ तुम देखते हो देखें मगर देखा और बातें तुम सुनते हो सुनें मगर सुनीं। पस बोलने वाले की तमसील सुनो। जब कोई बादशाही का कलाम सुनता है और नहीं समझता तो जो उस के दिल में बोया गया था उसे वो शरीर आकर छीन ले जाता है। ये वो है जो राह के किनारे बोया गया था। और जो पथरीली ज़मीन में बोया गया ये वो है जो कलाम को सुनता है और उसे फिलफौर ख़ुशी से क़ुबूल कर लेता है। लेकिन अपने अन्दर जड़ नहीं रखता बल्कि चँद रोज़ा है और जब कलाम के सबब से मुसीबत या ज़ुल्म बरपा होता है तो फिलफौर ठोकर खाता है। और जो झाड़ियों में बोया गया ये वो है जो कलाम को सुनता है और दुनिया की फिक्र और दौलत का फरेब उस कलाम को दबा देता है और वो बेफल रह जाता है। और जो अच्छी ज़मीन में बोया गया ये वो है जो कलाम को सुनता और समझता है और फल भी लाता है, कोई सौ गुना फलता है, कोई साठ गुना कोई तीस गुना।

क्या आप आसमान की बादशाही और इब्ने आदम का राज़ समझे? अभी भी समझे हों तो और तमसीलें भी ईसा ने बताईं हैं। नूर का काम हिदायत पहुँचाना और सही रास्ता दिखाना है। हिदायत पहुँचाने के लिए नूर ने नबी भेजे। आखि़र में नूर के तमाम अजज़ा जो कुल 14 हैं एक के बाद दूसरा इंसान की शक्ल में दुनिया में गए। पहला मौहम्मद जिसे इब्ने आदम कह कर मुख़ातिब किया गया बीज का बोने वाला था, इन के साथ ही एलया यानी अली आए जो नूर का दूसरा टुकड़ा है; और इन में से आखि़री यानी मेहदी या इमामे ज़माना जब आएँगे तो ख़ुदा का वादा पूरा होगा और आसमान की बादशाही क़ायम होगी। मेहदी चैदहवें नूर हैं और अब उनका आना बाक़ी है। मेहदी का ही इंतेज़ार मसीहा के तौर पर यहूदी और कलकी अवतार के तौर पर हिन्दू कर रहे हैं। मेहदी ख़ुदाई मदद से हर तरफ सच्चाई का राज क़ायम करेंगे और गुनाहगारों को सज़ा देंगे। युहन्ना और ईसा भी नूर के भेजे हुए नबी थे। क्योंकि वो इब्ने आदम यानी मौहम्मद से पहले आने वाले आखि़री नबियों में से थे इसलिए उनका मुस्तक़िल मक़सद उनके आने की पेशिंगोई करना था। ईसा ने कहा है कि शरीरयानी ज़ुलमत की ताक़त इब्लीस सही रास्ते की तालीम में बुराई दाखि़ल करने की कोशिश करेगी। ऐसा ही हुआ कि पाँच सौ सालों के अन्दर मौहम्मद आए और बेशतर ईसाई उन्हें पहचान पाए। आसमान की बादशाही जब आएगी जब ज़ुल्मत की ताक़त expose हो जाएगी, सिराते मुस्तक़ीम सब पर ज़ाहिर हो जाएगा और उससे जुदा सब रास्ते मिट जाएँगे। मत्ती 13:24-52 में देखिए क्या ईसा तमसीलों यानी मिसालों के ज़रिए यही बातें नहीं कह रहे जो हम ने कहीं हैं:

उस ने एक और तमसील उनके सामने पेश करके कहा कि आसमान की बादशाही उस आदमी की मानिंद है जिस ने अपने खेत में अच्छा बीज बोया। मगर लोगों के सोते में उसका दुश्मन आया और गेहूँ में कड़वे दाने भी बो गया। पस जब पत्तियाँ निकलीं और बालें आईं तो वो कड़वे दाने भी दिखाई दिए। घर के मालिक के नौकरों ने आकर उससे कहा खुदावंद क्या तूने अपने खेत में अच्छा बीज बोया था? उस में कड़वे दाने क्हाँ से गए? उसने उनसे क्हा ये किसी दुश्मन ने किया है। नौकरों ने उससे क्हा तो क्या तू चाहता है कि हम जाकर उनको जमा करें? उसने क्हा नहीं ऐसा हो कि कड़वे दाने जमा करने में तुम उनके साथ गेहूँ भी उखाड़ लो। कटाई तक दोनों को इकट्ठा बढ़ने दो और कटाई के वक़्त मैं काटने वालों से कह दूँगा कि पहले कड़वे दाने जमा करलो और जलाने के लिए उनके गट्ठे बाँध लो और गेहूँ मेरे खत्ते में जमा कर दो।

उसने एक और तमसील उनके सामने पेश करके कहा कि आसमान की बादशाही उस राई के दाने की मानिंद है जिसे किसी आदमी ने लेकर अपने खेत मे बो दिया। वो सब बीजों से छोटा तो है मगर जब बढ़ता है तो सब तरकारियों से बड़ा और ऐसा दरख़्त हो जाता है कि हवा के परिंदे आकर उसकी डालियों पर बसेरा करते हैं।

उसने एक और तमसील उनको सुनाई कि आसमान की बादशाही उस ख़मीर की मानिंद है जिसे किसी औरत ने ले कर तीन पैमाना आटे में मिला दिया और वो होते होते सब ख़मीर हो गया।

ये सब बाते यसूअ ने भीड़ से तमसीलों में कहीं और बग़ैर तमसील के वो उन से कुछ कहता था। ताकि जो नबी की मारेफत क्हा गया था वो पूरा हो कि मैं तमसीलों में अपना मूँह खोलूंगा।

मैं उन बातों को ज़ाहिर करूँगा जो बिनाए आलम से पोशीदा रही हैं।

उस वक़्त वो भीड़ को छोड़कर घर में गया और उस के शागिरदों ने उस के पास आकर क्हा कि खेत के कड़वे दानों की तमसील हम को समझा दे। उस ने जवाब में कहा कि अच्छे बीज का बोने वाला इब्ने आदम है। और खेत दुनिया है और अच्छा बीज बादशाही के फरज़न्द और कड़वे दाने उस शरीर के फरज़न्द हैं। जिस दुश्मन ने उनको बोया वो इब्लीस है और कटाई दुनिया का आखि़र है और काटने वाले फरिश्ते हैं। पस जैसे कड़वे दाने जमा किए जाते और आग में जलाए जाते हैं वैसे ही दुनिया के आखि़र में होगा। इब्ने आदम अपने फरिश्तों को भेजेगा और वो सब ठोकर खिलाने वाली चीज़ों और बदकारों को उसकी बादशाही में से जमा करेंगे। और उनको आग की भट्टी में डाल देंगे। वहाँ रोना और दाँत पीसना होगा। उस वक़्त रास्तबाज़ अपने बाप की बादशाही में आफताब की मानिंद चमकेंगे। जिस के कान हों वो सुनले।

आसमान की बादशाही खेत में छिपे खज़ाने की मानिंद है जिसे किसी आदमी ने पाकर छिपा दिया और खुशी के मारे जाकर जो कुछ उस का था बेच डाला और उस खेत को मोल ले लिया।

फिर आसमान की बादशाही उस सौदागर की मानिंद है जो उमदा मोतियों की तलाश में था। जब उसे एक बेशकीमत मोती मिला तो उस ने जाकर जो कुछ उसका था सब बेच डाला और उसे मोल ले लिया।

फिर आसमान की बादशाही उस बड़े जाल की मानिंद है जो दरया में डाला गया और उस ने हर किस्म की मछलियाँ समेट लीं। और जब भर गया तो उसे किनारे पर खींच लाए और बैठ कर अच्छी अच्छी तो बरतनों में जमा कर लीं और जो खराब थीं फेंक दीं। दुनिया के आखि़र में ऐसा ही होगा। फरिश्ते निकलेंगे और शरीरों को रास्तबाज़ों में से जुदा करेंगे और उनको आग की भट्टी में डाल देंगे। वहाँ रोना और दाँत पीसना होगा।

क्या तुम ये सब बातें समझ गए? उन्होंने उससे क्हा हाँ। उस ने उनसे क्हा इसलिए हर फकीह जो आसमान की बादशाही का शागिर्द बना है उस घर के मालिक की मानिंद है जो अपने खज़ाने में से नई और पुरानी चीज़े निकालता है।

तमसीलें देखिए। आसमान की बादशाही का शार्गिद वही होगा जो नई और पुरानी चीज़ों से बादशाही के राज़ को समझे। ये राज़ बहुत बड़ा खज़ाना है जो नई और पुरानी किताबों के इल्म को साथ रख कर समझ में आएगा। बड़े जाल की तमसील से साफ है कि दुनिया के आखि़र की बात हो रही है जब फरिश्ते अच्छे और बुरों को जुदा कर देंगे। आसमान की बादशाही सही रास्ते की तलाश में जुटे लोगों की है कि जब सीधा और सब से बेहतरीन रास्ता उनके सामने आएगा तो वो उस सौदागर की मानिंद जो उमदा मोतियों की तलाश में था और एक बेशकीमत मोती पा गया सब कुछ छोड़ के सीधे रास्ते को अपना लेगा। अगर ऐसा नहीं है तो मोती की तलाश मे जुटे शख़्स को बेशक़ीमत मोती मिलने पर बाक़ी सब कुछ बेच कर उस मोती को मोल लेने की क्या ज़रूरत थी? खेत के कड़वे दाने की तमसील सबसे अहम है। इब्ने आदम यानी मौहम्मद अच्छा बीज बोएगा। आप देख चुके हैं कि इस सिलसिले को उपनिषद और इस्लामी किताबों में सोने का सिलसिला कहा गया है। क्या इस से अच्छा कोई बीज हो सकता है? ‘बादशाही के फरज़न्दसे साफ है कि ये ख़ुदा की बादशाही का ज़िक्र नहीं है बल्कि उनकी जो ख़ुद फरज़न्द रखते हैं लेकिन ख़ुदा के सब से क़रीब हैं। अच्छा बीज बादशाही के फरजन्द यानी 13 मासूम जो मौहम्मद के बाद हुए और कड़वे बीज शरीर के फरज़न्द यानी ज़ुलमत और उसका लशकर हुए। दुनिया के आखि़र में इब्ने आदम अपने फरिश्तों को भेजेगा जो ठोकर खाने वाली चीज़ों यानी भटकाव वाले रास्तों को और बदकारों को अलग कर देंगे और सीधे रास्ते पर चलने वाले सूरज की तरह चमकेंगे। यही वो बातें हैं जिन के लिए ईसा ने क्हा कि मैं उन बातों को ज़ाहिर करूँगा जो दुनिया के बनने के वक़्त से पोशीदा रही हैं।

मत्ती 24:3-14 में भी ईसा साफ तौर पर कह रहे हैं कि आसमान की बादशाही की बातें आखि़री ज़माने की बातें हैं जिस के बाद दुनिया ख़त्म हो जाएगी। देखिएः

और जब वो ज़ैतून के पहाड़ पर बैठा था उसके शागिरदों ने अलग उसके पास आकर कहा हम को बता कि ये बातें कब होंगी? और तेरे आने और दुनिया के आखि़र होने का निशान क्या होगा? यसूअ ने जवाब में उनसे कहा कि ख़बरदार! कोई तुम को गुमराह कर दे। क्योंकि बहुतेरे मेरे नाम से आएँगे और कहेंगे मैं मसीह हूँ और बहुत से लोगों को गुमराह करेंगे। और तुम लड़ाईयाँ और लड़ाईयों की अफवाह सुनोगे। ख़बरदार! घबरा जाना! क्योंकि क़ौम पर क़ौम और सलतनत पर सलतनत चढ़ाई करेगी और जगह जगह काल पड़ेंगे और भोंचाल आएँगे। लेकिन ये सब बातें मुसीबतों का शुरू ही होंगी। उस वक़्त लोग तुम को ईज़ा देने के लिए पकड़वाएँगे और तुम को कत्ल करेंगे और मेरे नाम की ख़ातिर सब कौमें तुम से अदावत रखेंगी। और उस वक़्त बहुतेरे ठोकर खाएँगे और एक दूसरे को पकड़वाएँगे और एक दूसरे से अदावत रखेंगे। और बहुत से झूटे नबी उठ खड़े होंगे और बहुतेरों को गुमराह करेंगे। और बेदीनी के बढ़ जाने से बहुतेरों की मौहब्बत ठंडी पड़ जाएगी। मगर जो आखि़र तक बरदाश्त करेगा वो निजात पाएगा और बादशाही की इस ख़ुशख़बरी की मुनादी तमाम दुनिया में होगी ताकि सब क़ौमों के लिए गवाही हो। तब ख़ातमा होगा।

ईसा की एक और तमसील बहुत अहम है। वो ये कि जो भी रास्ता आसमानी बाप की तरफ से आया है उसके अलावा सब रास्ते बहकावे के रास्ते के तौर पर उजागर हो जाएँगे। देखिए मत्ती 15:13-14:

जो पौधा मेरे आसमानी बाप ने नहीं लगाया जड़ से उखाड़ा जाएगा। उन्हें छोड़ दो। वो अँधे राह बताने वाले हैं और अगर अँधे को अँधा राह बताएगा तो दोनों गढ़े में गिरेंगे।

देखिए, इसलिए ज़रूरी है कि राह बताने वाला आसमानी हो। यही वजह है कि अल्लाह ने नूर का systems बनाया। और अपने creation plan को राज़ में रखा ताकि ये राज़ जब ही ज़ाहिर हो जब आसमान की बादशाही आने को हो।

मत्ती 16:25-30 बहुत अहम है। ईसा कहते हैं:

जो कोई अपनी जान बचाना चाहता है उसे खोएगा और जो कोई मेरी ख़ातिर अपनी जान खोएगा उसे पाएगा। और अगर आदमी सारी दुनिया हासिल करे और अपनी जान का नुक़सान उठाए तो उसे क्या फाएदा होगा? या आदमी अपनी जान के बदले क्या देगा? क्योकि इब्ने आदम अपने बाप के जलाल में फरिश्तों के साथ आएगा। उस वक़्त हर एक को उसके कामों के मुताबिक़ बदला देगा। मैं तुम से सच कहता हूँ कि जो यहाँ खड़े हैं उन में से बाज़ ऐसे हैं कि जब तक इब्ने आदम को उस की बादशाही में आते देख लेंगे मौत का मज़ा हरगिज़ चखेंगे।

ईसा को गए 2011 साल हो गए। इब्ने आदम यानी मौहम्मद आकर चले गए लेकिन आसमान की बादशाही अभी आना बाक़ी है। तो क्या ईसा ने झूठ क्हा कि जो यहाँ खड़े हैं उनमें से कुछ जब तक इब्ने आदम को उसकी बादशाही में आते देख लेेंगे मौत का मज़ा हरगिज़ चखेंगे। नहीं, क्योंकि एक और मौहम्मद मेहदीको अभी आना बाक़ी है जिसके आने के बाद बादशाही क़ायम होगी।

कहा जा रहा है कि जो यहाँ खड़े हैं उन में से बाज़ ऐसे हैं कि जब तक बादशाही आते देख लेंगे मौत का मज़ा हरगिज़ चखेंगे किताब Muslims & The Straight Path में कुरआन, गीता और उपनिषद से साबित किया गया है कि ऐसा क्यों कहा गया। कुरआन साफ लफ्ज़ों में कह रहा है कि बनी इस्राईल के कुछ अफराद बन्दरों में तबदील कर दिए गए। बिहारूल अनवार में हज़रत अली से मनसूब एक रिवायत के मुताबिक़ वो लोग जो अपनी दाढ़ी मूँडा करते थे बिना छिलकों की मछली में तबदील कर दिए गए। ऐसी और भी रिवायतें हैं जिन में इंसान को किसी जानवर या पत्थर में तबदील करने की बात कही जा रही है। “Muslims & The Straight Path” में कुरआन, गीता और उपनिषद के हवालों से दिखाया गया है कि आवागमन एक हक़ीक़त है लेकिन ये उसके लिए नहीं है जिसने अल्लाह के Creation Plan को समझ लिया और अपनी मौत के वक़्त तक इस पर क़ायम रहा। यह वो मंज़िल है जिस पर पहुँच कर रूह अल्लाह की क़ुदरत में शामिल हो जाती है। यही  शहादत की मंज़िल है और यही कुरआन के आगे बढ़ जाने वाले लोग हैं।

ख़ुदा के Creation Plan को जानने का मतलब है नूरे ज़ाती और उसके पैदाकर्दा नूर को पहचानना जो आसमान पर है और इंसान की शक्ल में दुनिया में आया। दूसरे लफ्ज़ों में कहें तो इसका मतलब अपने वक़्त के इमाम को पहचानना भी है। ऐसे इंसान को ये नूरानी शख़्सियतों वहाँ ले जाएँगी जहाँ इनका रब मुक़ीम है यानी इन्हें आवागमन से निजात दिला कर हमेशा की ज़िन्दगी की तरफ ले जाएँगी। निजात पा सकने वाला इंसान बार बार पैदा होता रहेगा या दूसरे लफ्ज़ों में बार बार मरता रहेगा।

बात सिर्फ इतनी है कि हम पहले के पैग़म्बरों की तालीमात को मानने के सबब गुमराही में मुबतिला हैं। पहले की तालीमात वो basic knowledge थी जिसको समझ कर ही हम इब्ने आदम यानी आखि़री रसूल की तालीमात को समझ सकते थे। Rebirth यानी पुनर्जन्म सिर्फ आदम से ईसा के वक़्त तक रहा है बल्कि आज भी उन सब उम्मतों में मौजूद है जो अब तक मौहम्मद की उम्मत में शामिल नहीं हुए हैं। ये इसलिए क्योंकि जिस ने अपने वक़्त के नबी को पहचान लिया और उसके बताए रास्ते पर रास्तबाज़ी से चलकर अपनी रूह को इरतेक़ा के एक ख़ास मक़ाम तक ले गया वो दुबारा दुनिया में पैदा होने से निजात पा गया। निजात अपने वक़्त के नबी या इमाम के रास्ते पर जाने से है और इस ज़माने के नबी और इमाम को पहचाने बिना ये चाहे जितने अच्छे आमाल कर लें निजात हासिल नहीं कर सकते। ज़्यादा से ज़्यादा ये अपने अच्छे आमाल की बिना पर मौहम्मद की उम्मत में पैदा हो सकते हैं या जैसा गीता ने क्हा इन्ही के घराने में पैदा हो सकते हैं। आप समझे रसूल ने सय्यदों को फौक़ियत क्यों दी? अल्बत्ता सय्यदों को बहुत ख़ुश होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उनकी रूह की जिस्मों में मौजूदगी से ज़ाहिर है कि अब तक वो निजात पाने से क़ासिर रहे हैं।

एक और बात बहुत अहम है! वो ये कि सिर्फ अल्लाह के creation plan पर ईमान रखना ही निजात का ज़ामिन नहीं है। ये भी ज़रूरी है कि जिस्म से निकलते वक़्त रूह पाकीज़गी की उस मंज़िल पर हो जिस से निजात मुमकिन है। इसके लिए ज़रूरी है कि वो आमाल बजा लाए जाएँ और उन से परहेज़ किया जाए जिन से रूह उस मुश्किल चढ़ाई पर चढ़ सके जिस के आगे निजात है।

इसीलिए ईसा ने क्हा कि जो कोई मेरी ख़ातिर अपनी जान खोएगा उसे पाएगा। यानी जो ईसा की ख़ातिर मारा जाएगा वो हमेशा की ज़िन्दगी पाएगा। गीता में कृष्ण ने इसे जितना वाज़ेह तौर पर ब्यान किया है वो कहीं और नहीं मिलता। निजात पा जाने वाले शख़्स की रूह जिस्म से निकलते ही उसी लम्हे जन्नत पहुँचा दी जाती है जहाँ उसे हमेशा रहना है। ये बात सूरः यासीन से साबित है जिस के मुताबिक़ अल्लाह की राह में संगसार हुए आदमी को एैन उसी लम्हे जन्नत में पहुँचा दिया गया और उसके बाद उसको मारने वालों पर ख़ुदा का अज़ाब आया। निजातयाफ्ता ही आगे बढ़ जाने वाले लोग हैं जो बिना सवाल जवाब जन्नत में पहुँचा दिए गए। इन लोगों के लिए क़ुरआन मंे वादा है कि वो ज़िन्दा हैं और अपने रब से रिज़्क़ पाते हैं। दाएँ हाथ में आमाल लेने वाले वो हैं जो क़्यामत तक निजात पाएँगे लेकिन उनके अच्छे कामों का पलड़ा भारी होगा और बाएँ हाथ में आमाल लेने वाले वो जिन के बुरे कामों का पलड़ा भारी होगा।

आखि़री रसूल मौहम्मद पर ख़ुदा का एक करम ये है कि उनकी उम्मत को इस दुनिया में दूसरा जिस्म नहीं मिलेगा। हालाँकि इसके मायनी ये नहीं कि उनके मानने वालों में सबकी रूहें निजात पा जाएँगी। वो रूहें जो मौहम्मद की उम्मत में शामिल हो गईं लेकिन निजात हासिल कर पाईं उनके लिए बरज़ख़ की मंज़िल है जो क़यामत के फैसले के दिन तक रहेगी। उस दिन जिस के अच्छे आमाल का पलड़ा भारी है वो जन्नत में और जिस का हल्का है वो जहन्नुम में फेंका जाएगा लेकिन ये क़याम मुस्तक़िल होगा। निजात पा जाने वाले तो हमेशा जन्नत में रहेंगे लेकिन बक़ौल गीता और बुद्ध ये जब अपने कर्म की जज़ा पा चुकेंगे तो दुबारा अगली दुनिया में भेज दिए जाएँगे। ये बात कुरआन से भी साबित है कि वो फरयाद करेंगे कि एक और मौक़ा दिया जाए।

ये कुरआन और उपनिषद से साबित है कि रूह को रिज़्क़ चाहिए होता है अपनी बक़ा के लिए और चूँकि रिज़्क़ किसी जिस्म में रहकर ही मिल सकता है इसलिए वो रूहें जो जन्नत या जहन्नुम में नहीं पहुँच पाती उनको मजबूरन दुनिया में जिस्म तलाशने पड़ते हैं। यही साबित करने के लिए कुरआन ने जहाँ जहाँ जन्नत या जहन्नुम का तज़किरा किया वहाँ वहाँ रिज़्क़ का भी तज़किरा किया। जो रूहें निजात नहीं पा सकीं उनको इंसानी जिस्म से निकलते वक़्त रूह की कैफियत की बिना पर नए जिस्म मिलते हैं। ये जब तक होता रहेगा जब तक रूह इरतेक़ा की मंज़िल पर पहुँच कर निजात पा जाए, हिसाब का दिन जाए या रूह इतना नीचे गिर जाए कि वहाँ से निकलना मुहाल हो। इन गिरी हुई रूहों को कुरआन ने अँधा, गूँगा और बहरा कहा है और क्हा है कि नूर की हिदायत इन से सल्ब कर ली जाती है। ऐसी हालत में जिस्म से रूह निकलते ही उसे फौरी तौर पर जहन्नुम में भेज दिया जाता है जहाँ उसे हमेशा रहना है। यही मौत की मंज़िल है।

ईसा के सामने खड़े लोगों में से बाज़ यक़ीनन ऐसे होंगे जिन की रूहें अब तक दुनिया में ज़िन्दगी गुज़ारने पर मजबूर हैं हालाँकि इतने अर्से में उन्होंने कई जिस्म बदले होंगे। ये रूहें जब आख़िरी मसीहा के जाने के बाद उसका इंकार करेंगी तो इसके सबब उन्हें मौत हासिल होगी।


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