32 निशानियां एवं भविष्यवाणियां
आगे बढ़ते हैं और देखते हैं कि पुस्तिका के लेखक क्या विचार व्यक्त करने जा रहे हैं। वह लिखते हैंः
‘इस पुस्तक में हम क़िस्सों से हटकर तथ्यों पर आधारित इस्लाम की असलियत को और मौहम्मद के बारे में जानने की कोशिश करेंगे। इस पुस्तक में मौहम्मद की सच्चाई पर से पर्दा हटाया गया है। मौहम्मद एक प्रभावशाली, रहस्मयी, ज़िद्दी व्यक्ति थे। मोहम्मद अपनी खुद की बनाई हुई बातों को अल्लाह की बातें बता कर खुद भी मानते थे और दूसरों को भी उन बातों को मानने के लिए मजबूर करते थे, और जो लोग मौहम्मद की बात नहीं मानते थे तो मौहम्मद उनसे कहते थे कि अल्लाह क्रोधित हो रहा है। अल्लाह उन सबको जहन्नुम में भेजेगा जो अल्लाह पर और अल्लाह के रसूल पर भरोसा नहीं करेंगे। जो रसूल ने खुदा देखा और लोगों को बताया बस उस पर ही मुसलमानों को भरोसा करना चाहिए, अगर इसके आगे कुछ पूछने की कोशिश करें तो इस्लाम में अल्लाह रसूल के बारे में सवाल करना या सबूत मांगना गुनाह है।’
यहां लेखक वही बातें नए शब्दों में दोहरा रहे हैं जो पहले लिख चुके हैं। हालांकि वह कह रहे हैं कि ‘इस पुस्तक में हम किस्सों से हटकर तथ्यों पर आधारित इस्लाम की असलियत को और मौहम्मद के बारे में जानने की कोशिश करेंगे’ पर तथ्यों की उन्होंने कहीं भी बात नहीं की है। तथ्य क्या हो सकते हैं? कुष्ण ने कहा कि ‘मैं अवतार हूँ’, इसका प्रमाण आपको कौन देगा? या तो अवतार के जीवन के वाक़्यात से आप अंदाज़ा लगाएंगे कि वह अवतार हैं, जो उस समय के इहिहासकार ही बता सकते हैं। या अवतार के बारे में पहले के अवतारों ने और पहले आई डिवाईन पुस्तकों में जानकारी दी गई हो, जिससे आप मानें कि यह अवतार हैं। और या उस व्यक्ति द्वारा अपनी जिंदगी में दिखाए गए चमत्कारों से आप इस निर्णय पर पहुंच सकते हैं कि अमुक व्यक्ति अवतार है।
अस्ल हक़ीक़त यह है कि परमात्मा यानी होली स्प्रिट की ओर से आया अवतार रूहानियत के उस लेवल पर होगा जिसकी समझ केवल उसको ही हो सकती है जो स्वयं अपनी रूह को बेहतरी और उत्थान के मार्ग पर लगाने में लगा है। यही कारण है कि गीता भी इस बात को कह रही है और कुरान भी साफ शब्दों में कह रहा है कि इन डिवाईन स्क्रिपचर्स में दी गई शिक्षा से केवल वही व्यक्ति लाभान्वित हो सकता है जिसने अपनी आत्मा को बेहतरी और उत्थान के मार्ग पर लगा दिया है। अन्यों को गीता का संदेश बताना भी नहीं चाहिए, ऐसा गीता कह रही है।
Gita.XVIII.67:
This is never to be spoken about by you to one (spiritually) undisciplined, nor to one devoid of devotion, nor to one indisposed to listen, nor again to one who denies Me.
फिर ऐसा लेखक जो अवतार मौहम्मद का आबादी से दूर किसी गुफा में इबादत और अपने रब से रूहानी मिलन के लिए जाने को भी निगेटिव निगाह से देखता है उसको उनकी बातें कहां समझ आ सकती हैं।
उस समय की इतिहास की किताबों में क्या लिखा है, यह तो पढ़ने की लेखक ने कोशिश ही नहीं की। जिन्होंने इतिहास की किताबों से अवतार मौहम्मद की जिंदगी को समझने की कोशिश की वे भी इस नतीजे पर पहुंचे कि मौहम्मद एक बड़े विचारक थे जिन्होंने हर प्रकार की बुराई में जकड़े समाज में बड़ा परिवर्तन लाया। उदाहरण के लिए ज्यार्ज बरनार्ड शाॅ को पेश किया जा सकता है जो अवतार मौहम्मद को अवतार नहीं मानता था और न ही रूहानियत के उस मार्ग पर था कि उनके परमात्मा से रूहानी या नूरानी रिश्ते को समझ सकता लेकिन फिर भी उनके बारे में लिखता हैः
I have very carefully studied Islam and the life of its Prophet (PBUH). I have done so both as a student of history and as a critic. And I have come to conclusion that Mohammad (PBUH) was indeed a great man and a deliverer and benefactor of mankind which was till then writhing under the most agonising Pain.
एक और जगह लिखाः
I have always held the religion of Mohammad in high estimation because of its wonderful vitality. It is the only religion which appears to me to possess that assimilating capability to the changing phase of existence which can make itself appeal to every age... I have studied him - the wonderful man, and in my opinion far from being an Anti-Christ he must be called the Saviour of Humanity.
और यहां तक लिख दिया किः
I have prophesied about the faith of Mohammad that it would be acceptable to the Europe of tomorrow as it is beginning to be acceptable to the Europe of today. ... I believe that if a man like him were to assume the dictatorship of the modern world he would succeed in solving its problems in a way that would bring it the much-needed peace and happiness.
ज्यार्ज बरनार्ड शा ने स्वयं लिखा है कि उन्होंने अवतार मौहम्मद की जिंदगी और इस्लाम का अध्ययन किया। ज़ाहिर है उन्होंने इतिहास की किताबों से निष्पक्ष नज़र से उनको समझने की कोशिश की। पुस्तिका के लेखक ने कितना अध्ययन किया है वह स्वयं ही बताएंगे क्योंकि जो कुछ वह अपने मनघढंत शब्दों में लिख रहे हैं वह किसी इतिहास की किताब पर तो आधारित है ही नहीं।
इतिहास की किताबों से तो हम केवल अवतार मौहम्मद की जीवनी पढ़ सकते हैं। उनके अवतार होने का सबूत यदि मिलेगा तो उनसे पहले आए अवतारों के कथन में या पहले से मौजूद डिवाईन समझी जाने वाली किताबों में। या फिर उन चमत्कारों में जो उन्होंने दिखाए!
उदाहरण के तौर पर हम सिद्धार्त नामी व्यक्ति की जिंदगी में देखते है कि उनके आने से पहले से कई भविष्यवाणियां कर दी गईं थीं कि वे बुद्ध होंगे। यहां तक कि किताबों में कोई 32 निशानियां दर्ज थीं जो अवतार के शरीर में पाई जाएंगी।
अम्बाथा एक ज्ञानी ब्रहमिण था जिसको उसके ब्रहमिण गुरू पोक्खरासादी ने बुद्ध के पास भेजा कि वह जाए और देखे कि बुद्ध के शरीर में वे 32 निशानियां पाई जाती हैं कि नहीं जो एक अवतार में होती हैं। पोक्खरासादी के बारे में लिखा है कि वह न केवल तीन वेदों का ज्ञाता था बल्कि बहुत से अन्य ज्ञान रखता था। इनमें एक ज्ञान महापुरूष के शरीर में पाए जाने वाली निशानियों का था जिसके अनुसार उनके शरीर में 32 निशानियां होना अनिवार्य है। आज हमारे पास उन 32 निशानियों की लिस्ट उपलब्ध नहीं है लेकिन यह साफ है कि वेदिक आर्यवंशी अवतार की खोज के लिए कोई 32 निशानियां ढूंढते थे।
शरीर में 32 निशानियों के होने से साबित है कि यह निशानियां वही देगा जो पैदा करने वाला है। जो लोग कहते हैं कि बुद्ध खुदा में विश्वास नहीं रखते थे और एनलाईटेंमेंट उनका स्वयं का अर्जित था वे बताएं कि शरीर में 32 निशानियां भी क्या स्वयं की अर्जित थीं?
दूसरे यह बताएं कि यदि उस समय के पढ़े लिखे ब्रहमिण अपनी किताबों में से बुद्ध की 32 निशानियों के बारे में जान रहे थे तो कैसे हिन्दु और बुद्ध दो अलग धर्म हो गए? साफ है कि कृष्ण और बुद्ध एक ही सोर्स के अवतार थे पर मानने वालों ने शायद अपने हित के कारण धर्म की दीवारें खड़ी कर लीं। ऐसा ही मूसा, ईसा और मौहम्मद के साथ हुआ। तीनों एक ही सोर्स से थे, बल्कि मैं तो साबित कर रहा हूँ कि यह तीनों और कृष्ण और बुद्ध भी एक ही सोर्स के अवतार थे पर हर जगह मानने वालों ने अपनी समझ से दीवारेें खड़ी कीं और जहां भिन्न धर्म नहीं बनाए वहां ऐसे सैक्टस बना लिए जो आपस में लड़ते फिरते हैं जैसे शैव, वैष्णव और देवी के मानने वाले, या आर्थाडाॅक्स, कैथाॅलिक और प्रोटैस्टेंटस, या शिया, सुन्नी और वहाबी। जब एक ही अवतार के मानने वालों ने आपस में ही दीवारें खड़ी कर लीं तो दो विभिन्न इलाक़ों में आए विभिन्न भाषा बोलने वाले अवतारों के मानने वाले कैसे आसानी से एक रास्ते की समझ बना लेते?
पोक्खरासादी और अम्बाथा की बातचीत अम्बाथा सूत में मौजूद है। इस बातचीत में पोक्खरासादी साफ बताते हैं कि उनके पुर्खों से जो 'mystic verses' उन तक पहुंचे हैं, उनके अनुसार यदि वे 32 निशानियां किसी व्यक्ति में पाई जाएं तो केवल दो बातें हो सकती है - या तो वह एक चक्रवर्ती राजा होगा जिसका राज 4 बड़े समुद्रों की सरहदों तक फैला होगा और वह ऐसे धार्मिक उसूलों के साथ राज करेगा कि उसे न लाठी और न तलवार की आवश्यकता होगी। पर यदि ऐसा नहीं होता, तो वह बुद्ध होगा जो लोगों की आंखों पर पड़े पर्दों को हटा देगा।
जैसा हमने कहा कि 32 निशानियों की लिस्ट नहीं मिलती है पर यह साफ है कि उनमें से दो निशानियां बुद्ध की बहुत ही लम्बी ज़बान और आम लोगों से अलग प्रकार का लिंग होने के संबंध में थी। बुद्ध को भी ज्ञान था कि अम्बाथा उनके शरीर में वह निशानियां खोजने आया है, क्योेंकि लिखा है कि बुद्ध ने अम्बाथा को वह निशानियां उनके शरीर में ढूंढने में पूरी पूरी सहायता की। देखिए, क्या लिखा हैः
“Then the Blessed One went forth from his chamber, and began to walk up and down. And Ambattha did the same. And as he walked up and down, following the Blessed One, he took stock of the thirty-two signs of a great man, whether they appeared on the body of the Blessed One or not. And he perceived them all save only two. With respect of those two – the concealed member and the extent of the tongue – he was in doubt and perplexity, not satisfied, not sure.
And the Blessed One knew he was so in doubt. And he so arranged matters by his wondrous Gift that Ambattha the Brahmin saw how that part of the Blessed One that ought to be hidden by clothes was enclosed in a sheath. And the Blessed One so bent round his tongue that he touched and stroked both his ears, touched and stroked both his nostrils, and the whole circumference of his forehead he covered with his tongue.
And Ambattha, the young Brahman thought: “The Samana Gautam is endowed with the thirty-two signs of a great man, with them all, not only with some of them.””
एकदम साफ है कि 32 निशानियों में से एक यह थी कि बुद्ध की इतनी बड़ी जीभ थी कि उससे वह अपने दोनों कानों, नाक और माथे को छू सकते थे। दूसरी निशानी बुद्ध के लिंग से संबंधित है जिसको समझाने की कोशिश करते हुए लिखने वाले ने जो शब्द प्रयोग किए हैं वह यह हैंः “enclosed in a sheath”. ‘Sheath’ कहते हैं म्यान या ख़ोल को। जैसे म्यान में तलवार रहती है ऐसा प्रतीत होता था जैसे बुद्ध का लिंग भी किसी म्यान में है।
जब किसी को नहीं पता कि वे 32 निशानियां क्या थीं तो हम कैसे ढूंढ सकते हैं कि वही 32 निशानियां अवतार मौहम्मद और अन्य अहललबैत में थीं कि नहीं। लेकिन ऐसे समय में जब हर कोई दूसरे की किताबों और उनमें दर्ज ऐतिहासिक घटनाओं तक को संदेह की नज़र से देखता है, जैसे उन अवतारों के मानने वालों ने वे बातें गढ़ लीं होंगी, सत्य मार्ग की पहचान तब ही होगी जब इस ज़माने में वे राज़ सामने आ जाएं जो आज तक किताबों में मौजूद होने के बावजूद छिपे हुए हैं। जो बात आज तक किसी ने नहीं कही या समझाई, वह सामने आ जाए तो आप कैसे झुठलाएंगे कि उस समय के लोगों ने इन बातों को गढ़ लिया होगा।
जब हमें 32 निशानियों का पता ही नहीं तो हम उन्हें अवतार मौहम्मद या अन्य अहललबैत के शरीर में कैसे ढूंढ सकते हैं। एक बात जो हर मुसलमान मानता है वह ये कि अवतार मौहम्मद के दाएं कंधे के पीछे एक निशान था जिसको नबी होने की निशानी कहा जाता है। बल्कि हम पाते हैं कि उनके समय में भी कुछ यहूदी और ईसाई आकर उस मोहर को देखा करते थे। हर कोई मानता था कि अवतार मौहम्मद के कंधे पर जो निशान है वह नबी होने की मोहर या निशानी है।
एक बहुत ही मशहूर वाक़्या बताते चलें। यह इतना मशहूर है कि इस वाक़्ये का उल्लेख करते हुए आप को यूटयूब पर 'Mohre Nubuwat' नाम से एक नज़्म यानी कविता भी मिल जाएगी। एक समय अवतार मौहम्मद कई रोज़ से बहुत बीमार थे। बीमारी के सबब कमज़ोरी छा गई थी। कई दिन की बीमारी के बाद अवतार मौहम्मद खुतबा देने मस्जिदे नबवी में आए तो वहां बड़ी संख्या में चाहने वाले जमा थे। हर कोई उनके दीदार के लिए बेताब था। खुतबे में आपने हर समय खुदा के हुक्म पर अमल करने की हिदायत की और घोषणा करी कि यदि मेरी जानिब से किसी को ज़रा भी दुख पहुंचा हो तो वह किसी डर या झिझक के बिना आकर अपना बदला ले सकता है। यदि किसी का कोई कर्ज़ मुझ पर है तो वह भी आकर सब के सामने बताए क्योंकि जिंदगी में कर्ज़ अदा कर देना हर किसी पर फर्ज़ है।
वहीं खड़ा एक व्यक्ति सामने आया और कहने लगा कि एक रोज़ की बात है कि आप ऊंट पर सवार थे और मैं ऊंट के आगे उसकी महार पकड़ कर चल रहा था। आप ने एक बार ऊंट को कोड़ा मारा तो वह मेरी पीठ पर लगा। आज मैं उसका बदला आप से चाहता हूँ। यह सुनते ही चाहने वालों में शोर मच गया। मुसलमानों में बड़ा गुस्सा था कि ऐसी जुर्रत कोई कैसे कर सकता है। लेकिन अवतार मौहम्मद ने सब को समझाया और ख़ामोश किया और उस व्यक्ति से कहा कि हर हक़दार को उसका हक़ मिलना चाहिए। यदि इसकी पीठ पर मेरा कोड़ा पड़ा था तो इसको बदला लेने का हक़ है। आप ने बिलाल से कहा कि जाओ मेरे घर से वही कोड़ा ले आओ जो इस व्यक्ति के अनुसार मेरे हाथ में था। बिलाल घर पहुंचे और बेटी फातिमा को इस बात की ख़बर हुई तो रोने लगी कि इस समय बाबा को चलने की भी ताक़त नहीं, वह कोड़ा कैसे खांएगे। तमाम चाहने वालों ने उस व्यक्ति को समझाने की कोशिश की लेकिन वह बदला लेने पर अडिग था। अवतार मौहम्मद ने उसको कोड़ा थमाया और उसकी ओर पीठ कर के खड़े हो गए।
उस व्यक्ति ने कहा कि ऐ रसूल, उस समय मैं नंगी पीठ था जब आप का कोड़ा मेरी पीठ पर पड़ा था। इंसाफ तो तब होगा जब आप भी नंगी पीठ हों। अवतार मौहम्मद ने अपनी कमीज़ उतारी और उसके सामने खड़े हो गए।
उस व्यक्ति ने कोड़ा हाथ से फेंका और आगे बढ़ कर अवतार मौहम्मद के कंधे पर मोहरे नुबूवत को चूम लिया। यह कहते हुए कि मैंने सुना है कि जो इस मोहर को चूमे वह स्वर्ग में अवश्य जाएगा।
उस समय जब सारा अरब उनको अल्लाह का पैग़म्बर और इस्लामी स्टेट का हुकमरान मान रहा था, तब यदि अवतार मौहम्मद ने किसी से नाइंसाफी करने की नहीं सोची तो वह कैसे और क्योंकर अपने को अल्लाह का रसूल न मानने वालों पर ज़बरदस्ती करते या उन्हें ज़बरदस्ती इस्लाम में आने को कहते जबकि कुरान साफ शब्दों में कह रहा था कि ‘तुम्हारा दीन तुम्हारे लिए, मेरा दीन मेरे लिए’।
लेकिन अभी बात उन निशानियों की कर रहे हैं जो सनातन 'mystic verses' में मिलती थीं।
हमारे पास अपनी बात का सबूत तो नहीं लेकिन अक़ल की बुनियाद पर एक रोचक तथ्य आपके सामने पेश करते हैं। तमाम यहूदी, ईसाई और मुसलमान मानते हैं कि ख़तने यानी circumcision का हुक्म पैगम्बर इब्राहीम के समय आया और उसके बाद से ख़तना करवाना हर मर्द पर अनिवार्य हो गया। मुसलमानों के एक गुट का मानना है कि अहललबैत को ख़तने की आवश्यकता नहीं होती और वह पैदा ही ख़तने के साथ होेते हैं। अवतार मौहम्मद भी अहललबैत में शामिल हैं। यहां बता दें कि ख़तना लिंग की आगे की त्वचा को काटने को कहते हैं। ज़रा बताईए, बुद्ध के समय में, जब भारत में किसी को नहीं पता हो कि ख़तना क्या होता है, तो वह ऐसे लिंग को कैसे समझाएगा। ऐसे ही तोः 'enclosed in a sheath'.
एक और बहुत ही रोचक बात हमको पढ़ने को मिलती है जो हमारी आपकी जिंदगी में आम तौर पर नहीं होती। वह ये कि अवतार मौहम्मद अपनी ज़बान अपने नवासों हसन और हुसैन के मुंह में दे देते थे और बच्चे उसको चूसते थे। करबला में मिलता है कि जब हुसैन का जवान बेटा जो दूसरों के समान तीन दिन का भूखा प्यासा था युद्ध करते करते प्यास से बेहाल हो गया और पलट कर उसने अपने पिता हुसैन से कहा कि ज़बान सूखी हुई है, यदि दो घूंट पानी मिल जाता तो मैं युद्ध करके दिखाता तो हुसैन ने कहा कि तुम मेरी ज़बान अपने मुंह में ले लो। हुसैन ने अपनी ज़बान अकबर के मुंह में डाली तो अकबर ने तुरंत यह कहते हुए अपना मुंह पीछे खींच लिया कि ‘बाबा, आपकी ज़बान तो मेरी ज़बान से भी ज्यादा सूखी है।’ क्या मौहम्मद और हुसैन दूसरे के मुंह में ज़बान देकर आज के इंसान के लिए इशारा छोड़ रहे थे कि जिन 32 निशानियों की बात सनातन 'mystic verses' में मिलती थी, वे 32 निशानियां हम अहललबैत के शरीर में भी मौजूद थीं?
यही अम्बाथा सूत बताता है कि ब्रहमिण अम्बाथा के बाद ब्रहमिण पोक्खरासादी स्वयं बुद्ध के सामने आया उन 32 निशानियों को परखने। उसने भी बुद्ध के शरीर पर 30 निशानियां देख लीं पर बाक़ी 2 निशानियों को लेकर वह भी असमंझस में था। अम्बाथा के ही समान बुद्ध ने भी पोक्खरासादी को अन्य दो निशानियां भी दिखा दीं जो सनातन 'mystic verses' के अुनसार एक महापुरूष में होना अनिवार्य हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि महापुरूष की निशानियां यदि भारतीय किताबों में दी गई थीं तो ईसा के मानने वालों को भी उन निशानियों की जानकारी थी। अवतार मौहम्मद की उम्र 25 वर्ष थी जब उन्होंने ख़दीजा के व्यापारिक क़ाफिले को लेकर बसरा का सफर किया। अभी 15 से अधिक वर्ष बाक़ी थे जब उन्होंने अपने अवतार होने की घोषणा की। रास्ते में यह क़ाफिला नस्तूरी राहिब के ठिकाने के क़रीब रूका। मौहम्मद एक सूखे पेड़ के नीचे ठहरे तो लोगों ने देखा कि चंद लम्हे में वह सूखा पेड़ हरा भरा हो गया। लोग हैरान रह गए। जब नस्तूरी राहिब ने यह देखा जो ईसाई था और पुरानी खुदाई किताबों का जानकार था तो वह अपनी एक पुरानी किताब लेकर आया जिसमें अंतिम ज़माने के रसूल का हुलिया और उनके सामने आने की निशानियां दर्ज थीं। उसने वह किताब पढ़कर मौहम्मद से बातचीत की और अंत में वह किताब को पढ़ता जाता था और मौहम्मद के हुलिये से मिलाता जाता था और कहता जाता था कि ईसा पर इंजील पुस्तक भेजने वाले खुदा की क़सम ये वही हैं जिनकी भविष्यवाणी ईसा दे गए हैं और कोई शक नहीं है कि यही अंतिम ज़माने के रसूल हैं जिनकी खबर हमारी किताबों में दी गई है। काश कि मैं वह समय देख पाता जब यह अपने अवतार होने की घोषणा करेंगे और मै भी उनके दुश्मनों से युद्ध लड़ सकूं।
नस्तूनी राहिब की किताब में भी 32 ही निशानियां थीं, या कम या अधिक, आज किसी को जानकारी नहीं!
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पहले की भविष्यवाणियां
एक और तथ्य जो प्रमाण दे सकता है कि अमुक व्यक्ति अवतार है वह पहले के अवतारों या डिवाईन पुस्तकों में दी गई जानकारी की बुनियाद पर हो सकता है। अवतार मौहम्मद और उनके साथ अन्य अहललबैत के उस स्थान पर आने की जानकारी तो आदम के समय से नबी और रसूल देते आ रहे थे।
कहते हैं कि आदम जब ज़मीन पर आए तो उन्होंने उस स्थान पर एक निशानी बनाई जहां पर आज काबा स्थित है। यह ज़मीन पर खुदा के घर की निशानी थी इसलिए बैतुल्लाह यानी ‘अल्लाह का घर’ कहलाया। आदम को भी पता था कि निजात या मोक्ष देने वाली सब की सब हस्तियां इसी स्थान पर नवजात बच्चों के समान मानव शरीर में अवतरित होंगी। जब आदम को पैदा किया गया तो भी यह दिव्यात्माएं उपस्थित थीं। बल्कि कुरान के अनुसार आदम ने इन दिव्यात्माओं को उनके नाम के साथ पहचाना तब वह इस लाएक़ हुए कि फरिश्तों से कहा गया कि आदम को सिजदा करें।
Psalms [Ps. 82.1; 50.1; 82.6] भी इन divinities का बहुवचन यानी plural में उल्लेख करती है और Genesis, 3.22 ‘हमारे जैसा’ कह कर बात करती है। Psalm 50.1,3 (49.1, 3 LXX) खुदा की बात करते हुए उसे ‘God of gods’ कह कर बुलाती है। इन्हीं divinities की हक़ीक़त न समझ पाने के कारण कमेंटेटर्स ने उनको 'gods' कहा। रोचक बात यह है कि आज के हिन्दु भी इस राज़ को नहीं समझ पाए और शब्द देवता का जब अंग्रेज़ी में अनुवाद किया जाता है तो small 'g' साथ gods लिख देते हैं।
गीता साफ शब्दों में बता रही है कि उस समय के लोग इन्हीं देवताओं की पूजा करने लगे थे और उनसे ऊपर किसी ताक़त को नहीं पहचान रहे थे। गीता देवताओं का महत्व तो बनाए रखती है लेकिन उनसे ऊपर परमात्मा यानी विष्णु यानी साकार स्वरूप की बात करती है और अपनी तमाम इबादतों को एबसोलूट यानी क़ादिरे मुतलक़ अल्लाह के लिए करने की बात करती है। साफ कहा जाता है कि परमात्मा उस समय भी था जब देवताओं का क्रिएशन हुआ। अफसोस की बात यह है कि वेदों और गीता के अनुवादकों ने भी यहां पर खुदा के लिए 'God of gods' ही अनुवाद किया जैसे ईसाई किताबों के अनुवादकों ने किया।
Gita.XI.12-13:
If the splendour of a thousand suns were to rise together in the sky that might resemble the splendour of that great Soul.
There the Pandava (Arjuna) then beheld the whole world, divided into many kinds, unitively established in the body of the God of gods (devas).
दोनों ही उन डिवाईन हस्तियों को नहीं पहचान पाए जिनकी बात यह ग्रन्थ कर रहे थे।
कुरान (95:8) में खुदा को ‘the judge of the judges’ कहा गया है। सारी सृष्टि के लिए जज यही दिव्यात्माएं यानी नूरानी रूहें बनाई गई हैं, लेकिन ‘the judge of the judges’ कोई और है जो इन जजों का भी जज है।
Quran.95.8:
Is not Allah the Greatest Judge upon all judges?
इसी प्रकार Psalms इन दिव्यात्माओं को ’sons of the Most High’ और ‘You are gods’ कह कर बात करती है। एक स्थान पर कहती हैः
Psalm.82:
I have said, you are gods and all the sons of the Most High, but you die like men.
खुदा के ख़ास बन्दों की बात थी तो वहां sons अनुवाद कर दिया और देवताओं यानी नूरानी रूहों यानी divinities की बात थी तो gods with small 'g' अनुवाद कर दिया। लेकिन वहां भी एकदम साफ इशारा दिया जा रहा है कि कोई समय आएगा जब ये gods with small 'g' और sons of the Most High मानव शरीर में अवतरित होंगे, क्योंकि मानव शरीर में आएंगे तब तो मानव के समान मौत पाएंगे (die like men).
बड़ी रोचक बात यह है कि Dead Sea Scrolls भी कुछ नूरानी हस्तियों 'Divine Beings' की बात कर रहे हैं जो खुदा के समक्ष बैठे हैं (sitting in the ‘council of God’)। अब ज़रा दिल पर हाथ रखकर बताईए, अल्लाह के समक्ष बैठने वालों को जिस स्थान पर अवतरित होना था उसी स्थान को तो baytullah यानी ‘अल्लाह का घर’ कहा जाएगा। और जो नूरानी हस्तियां वहां जन्म लेंगी उनको Ahlulbayt(ullah) यानी अल्लाह के घर के लोग।
कुरान (33:33) कह रहा है कि हे अहललबैत हम ने तुम को पूरी तरह पाक बनाया है और छोटी से छोटी बुराई भी तुम्हारे क़रीब नहीं आ सकती। नूरानी ताक़तों का perfectly pure होना आवश्यक था तभी तो इंसान उनको पहचानते हुए उनसे हिदायत पा सकता है और आंख बंद करके उनके बताए मार्ग पर चल सकता है। जुलमत के लिए लिखा है कि उसे impure या materialistic ताक़तों से क्रिएट किया गया। यही कारण है कि जुलमत दुनिया की रंगीनी की ओर खींचती है जबकि नूरानी राहों के मुसाफिर इस से अपने को समेटते हुए आत्मिक उत्थान की राहों पर आगे बढ़ते जाते हैं।
आदम के बाद से तमाम ऋषि और अवतार उस समय की भविष्यवाणी करते रहे जब यह दिव्य हस्तियां मानव शरीर में आएंगी। ईसा जब सूली पर चढ़ाए गए तो उनके मुख से निकला कि ‘हे एलया, तुम ने इस घड़ी मुझे क्यों फरामोश कर दिया?’ ईसा के मुख से निकला यह कथन बाईबल के हर वर्ज़न में मौजूद है। इस कथन से साफ है कि ऐलया नाम की कोई दिव्यात्मा यानी नूरानी रूह ईसा की सहायता करती रही थी। यही कारण है कि ईसा कहते हैं कि अब जो मसीयाह आएगा, उससे ष्ेचपतपज व िजतनजीष् यानी ‘सच्चाई की रूह’ जुड़ी रहेगी। यहां पूर्ण सच्चाई की बात हो रही है जो जब ही आती है जब perfect purity हो।
John.14:16 and 26:
I will ask the Father, and he will give you another to be your advocate, who will be with forever - the spirit of truth. Your advocate will teach you everything, and will call to mind all that I have told you.
ईसाई समझ ही नहीं पाते कि यह क्या बात हो रही है! वे खुदा, होली स्प्रिट और ईसा के जतपदपजल के कानसैप्ट को तो जानते थे। पर क्योंकि वे वेद और उपनिषद के ज्ञान से अनभिज्ञ थे, वे नहीं समझ पाए कि होली स्प्रिट यानी परमात्मा से ब्रहमा या नूरे मौहम्मदी नामी जो दिव्यात्मा शक्ति बनी वह 7 दिव्यात्माओं में विभाजित हुई जो उस ब्रहमा के एकदम समान थे जिससे यह विभाजन हुआ था। यही 7 दिव्यात्माएं यानी नूरानी रूहें हर ज़माने में हिदायत और सत्य मार्ग की ओर इंसानियत को लाने में लगी रही हैं।
जैसे अनेक हिन्दु कृष्ण और परमात्मा को एक समझ बैठते हैं, वैसे ही ईसाईयों ने भी होली स्प्रिट को केवल ईसा से जोड़ कर देखा। जबकि गीता में कृष्ण के मुख से परमात्मा स्वयं कह रहा था कि जब जब अधर्म फैल जाता है और सत्य मार्ग के उसूल मिटने लगते हैं तब तब ऐसे ही किसी किसी मानव शरीर को वह नूरानी रूह अपना आफिस बनाती है। हालांकि ईसाई इस बात को मानते हैं कि दुनिया में इंसान के आने के साथ 7 रूहें इस ज़मीन पर भेजी गईं थीं पर वे इससे अधिक कुछ नहीं जानते।
बाईबल गाॅस्पल आफ सेंट लूक, चैप्टर 1 के अनुसार एलीज़ेबैथ के शरीर में भी होली स्प्रिट काम कर रही थी, ज़करया के शरीर में भी होली स्प्रिट ही काम कर रही थी और यहया के शरीर में भी होली स्प्रिट उनकी मां के पेट से ही काम कर रही थी। यदि एक के लिए लिखा है कि होली स्प्रिट उनकी मां के पेट से काम कर रही थी तो इसका अर्थ साफ है कि अन्य ऐसे भी होंगे जिनके शरीर को उस होली स्प्रिट ने बाद में किसी समय अपने आफिस के रूप में प्रयोग करना प्रारंभ किया होगा। ईसा भी जब कभी भी कोई चमत्कार दिखाते, वह यही कहते कि होली स्प्रिट ने ऐसा किया। होली स्प्रिट किस देवता के माध्यम से उनके शरीर को आफिस बनाए थी, यह हम ईसा के उस अंतिम समय के कथन से समझ सकते हैं जब वह कहते हैंः हे एलया, तुम ने इस समय मुझे क्यों फरामोश कर दिया ।
इधर अल्लामा तबातबाई ने भी लिखा है कि रूहुल कुदुस फरिश्तो से बड़ी कोई हस्ती है जो आसमान की बुलन्दी पर मुक़ीम है। उस रूह और उसके विभिन्न अंशों के बारे में हमें जानना आवश्यक है जो हर ज़माने में इंसान की हिदायत की राहों पर लाने में लगी रहीं। बल्कि उपनिषद तो यहां तक बता रहे हैं कि इससे पहले की 7 क्रिएशन में इन हस्तियों को किन नामों से जाना जाता था। साफ है कि यही दिव्यात्माएं यानी नूरानी रूहें पिछली तमाम क्रिएशन में इंसान को हिदायत देने के काम में लगी थीं। सनातन ग्रन्थों के अनुसार हम जिस क्रिएशन में सांस ले रहे हैं यह ब्रहमा के इस दिन की 994वीं क्रिएशन है यानी इस आदम से पहले 993 आदम इस दुनिया में आ चुके हैं और अब यह 994वीं क्रिएशन हैं। सनातन ग्रन्थों के अनुसार ब्रहमा का एक दिन 1000 क्रिएशन का होता है जिसके बाद तमाम सृष्टि को वापिस समेट लिया जाता है और कुछ नहीं बचता सिवाय परमात्मा यानी वजहुल्लाह के।
हमें आशा है कि कृष्ण, बुद्ध, मूसा, ईसा, मौहम्मद और अली का होेली स्प्रिट से क्या रिश्ता था अब आप पर साफ हो गया होगा। यदि आज वे राज़ खुल रहे हैं जो हमेशा से छिपे हुए थे, जिनके बारे में अब तक किसी को जानकारी नहीं थी, और इस दौर में गीता, वेद और कुरान से और ईसा आदि के कथन से वे सब जानकारी प्राप्त हो रही है जो इंसानियत आज तक नहीं जानती थी, तो इन हस्तियों और स्क्रिपचर्स का एक ही सोर्स से होने के इससे बड़े क्या सबूत हो सकते हैं?
यह नूरानी रूहें तो हैं ही इस दुनिया में। जुलमत यानी तमस यानी डैमोनिक ताक़तें अपनी तमाम कोशिश में लगी हैं कि इन को मात दे दें। नूरानी रूहें हर ज़माने में हिदायत के काम में लगी रहीं। अरब में मक्का के आसपास यदि कुछ भिन्न हुआ तो वह यह कि यह 7 रूहें एक के बाद एक 14 जिस्मों में हिदायत के काम को पूर्ण करने हेतु आईं। इन तमाम नूरानी रूहों के एक ही जगह पर अवतरित हो जाने को ईसा ने ‘spirit of truth’ यानी ‘सच्चाई की रूह’ का आना बतलाया। और जब यह अहललबैत ज़मीन पर थे तो कुरान ने इनकी पूर्ण सच्चाई, यहां तक कि perfect purity की गारंटी देकर गवाही दी कि यही वे ‘spirit of truth’ है जिसके अवतरित होने की ईसा भविष्यवाणी कर रहे थे।
सारी दुनिया जानती है कि ईसा की पैदाईश में किसी मर्द का कोई रोल नहीं था। वह Virgin Mary के पुत्र थे। फिर यदि ईसा Son of Man के आने की बात करें, वह भी उस समय जब उन्हें गिरफतार कर लिया गया हो और थोड़ी देर में मुक़दमे का फैसला सुना कर उन्हें सूली पर चढ़ाने को ले जाना था तो आप समझ सकते हैं कि ईसा के लिए उस Son of Man के आने की जानकारी हम तक पहुंचाना कितना महत्वपूर्ण था।
Bible.26.62:
Then the high priest stood up and said to Jesus, “Are you not going to answer? What is this testimony that these men are bringing against you?”
Bible.26.63:
But Jesus remained silent. The high priest said to him, “I charge you under oath by the living God: Tell us if you are the Jesus, the Son of God.”
Bible.26.64:
“Yes, it is as you say,” Jesus replied. “But I say to all of you: In the future you will see the Son of Man sitting at the right hand of the Mighty One and coming on the clouds of heaven.”
Bible.26.65:
Then the high priest tore his clothes and said, “He has spoken blasphemy! Why do we need any more witnesses? Look, now you have heard the blasphemy.
Bible.26.66:
What do you think?” “He is worthy of death,” they answered.
Bible.26.67:
Then they spit in his face and struck him with their fists. Others slapped him.
हम ने आप को दिखाया कि ऋग वेद कह रहे है कि मारूत नवजात बच्चों की तरह पैदा होंगे तो ईसा Son of Man की बात करके एकदम साफ करना चाहते हैं कि यह उनके स्वयं के दोबारा आने की बात नहीं हो रही बल्कि आने वाला कोई और होगा क्योंकि ‘मर्द का पुत्र’ तो ईसा किसी हाल में नहीं हो सकते। हमने कुछ पहले दिखाया है कि एक और पुस्तक यह कहकर कि वे इंसानों की तरह मरेंगे साफ कर रही है कि वे इंसान के स्वरूप में जीवन व्यतीत करेंगे।
एक और स्थान पर ईसा ने कहाः
John.16, 7-14:
It is for your good that I am leaving you. If I do not go, your advocate will not come. When he comes, he will confute the world, and show where wrong and right and judgment lie.
There is still much that I could say to you, but the burden would be too great for you now.
However, when he comes who is the spirit of truth, he will guide you into all the truth; for he will not speak on his own authority, but will tell only what he hears; and he will make known to you the things that are coming.
ध्यान से पढें! ईसा का ज़ोर दो बातों पर है। एक यह कि जब वह आएगा जो 'spirit of truth' है तो वह जो भी हिदायत करेगा वह सब सत्य होगा, क्योंकि वह अपने मन से कुछ भी नहीं बोलेगा, बल्कि वही कुछ बोलेगा जो वह सुनेगा, और वह तुम्हें आने वाले वाक़्यात की भविष्यवाणी देगा।
ईसाई बताएं कि ईसा के बाद कौन हस्ती ऐसी आई जो इस विवरण पर फिट बैठती हो? सिवाय अवतार मौहम्मद के! यह विवरण ईसा के दोबारा आने की बात नहीं कर रहा क्योंकि यहां तो ईसा उस आने वाले की खूबियां बता रहे हैं। यदि स्वयं दोबारा आने की बात होती तो अपनी खूबियां क्यों बताते, जो कि लोग जान ही रहे थे? बल्कि वह तो कह रहे हैं कि यदि मैं नहीं जाऊंगा तो वह आने वाला नहीं आएगा। दूसरी ओर कुरान मौहम्मद के लिए क़सम खा रहा है कि वे अपनी मर्ज़ी से कुछ नहीं बोलते सिवाय उसके कि जो उनकी ओर भेजा गया।
Quran.53.1-6:
By the Star when it goes down,-
Your companion [Mohammad] has not strayed, nor has he erred,
Nor does he speak from [his own] inclination.
It is not but a revelation revealed,
Taught to him by one intense in strength –
One of soundness.
इसी प्रकार Deut में मूसा से संबोधन करते हुए भविष्यवाणी की जा रही है कि मूसा के जैसा पैग़म्बर भेजा जाएगा, जिसकी बातों को सुनना सब पर अनिवार्य होगा।
Deut.18.18-19:
I will raise up for them a prophet like you (Musa), and I will put my words into his mouth. He shall convey all my commands to them, and if any one does not listen to the words which he will speak, I will require satisfaction from him.
मूसा ने खुदा से अपनी सहायता के लिए किसी को मांगा तो उन्हें हारून दिए गए थे। यदि अवतार मौहम्मद उनके जैसे थे तो उनके साथ हारून जैसा कौन था?
ईसा क्योंकि अवतार मौहम्मद से पहले आए अंतिम अवतार थे इसलिए उन्होंने बार बार आने वाले पैग़म्बर की भविष्यवाणी की। बल्कि ईसा यह भी कंफर्म कर रहे थे कि उनके पहले के पैग़म्बर भी यही भविष्यवाणी करते हुए गए। जैसे यह उदाहरण देखिएः
Acts.3.22-25:
The Lord God will raise up a prophet for you from among yourselves as he raised me, you shall listen to everything he says to you, and anyone who refuses to listen to that prophet must be extirpated from Israel.” And so said all the prophets, from Samuel onwards; with one voice they all predicted these days. You are the heirs of the prophets; you are within the covenant which God made with your fathers, when he said to Abraham, “And in your offspring all the families on earth shall find blessings.
यदि आप मेरे साथ वेद पढ़ेंगे तो आप पाएंगे कि वेद इन्हीं दिव्यात्माओं का या तो नूरानी रोल बता रहे हैं या उस समय के वाक़्यात और हालात का विवरण दे रहे हैं जब यह दिव्यात्माएं किसी छिपी हुई जगह पर या middle country में मानव शरीर में आएंगी।
वेद में इनका विवरण पढ़ कर भला कौन झुटला सकता है कि केवल मौहम्मद ही नहीं बल्कि तमाम अहललबैत का डिवाईन रोल क्या है? हालांकि मेरा मानना है कि वेद की अस्ली समझ अभी बनना बाक़ी है।
यह तो हुई पहले के ज़माने में मौहम्मद के बारे में की गई भविष्यवाणियों की बात। ईसा की जो भविष्यवाणी हम ने ऊपर पेश की उसमें ईसा उस आने वाले की पहचान बताने के लिए दो बातें कहते हैं। एक तो यह कि वह अपनी ओर से कुछ नहीं बोलेगा और जो कुछ बोलेगा वह उसके खुदा की ओर से होगा। हमने दिखाया कि कुरान अवतार मौहम्मद के लिए साफ कह रहा है कि वह अपनी ओर से कोई कलाम नहीं करते। दूसरी पहचान जो ईसा ने बताई उसके अनुसार he will make known to you the things that are coming. यानी वह आने वाला अवतार अपने समय के आगे की बातें हम को पहले से बता देगा। यह एक और सबूत है जो अवतार मौहम्मद के डिवाईन रोल की ओर इशारा करता है।
अवतार मौहम्मद ने जो भविष्यवाणियां कीं उनमें से बहुत सी अब इस ज़माने में पूरी हुई हैं या अभी भी पूरी होना बाक़ी हैं। ये भविष्यवाणियां हज़ार वर्षों से अधिक से विभिन्न किताबों में मौजूद हैं। कोई यह नहीं कह सकता कि जो आज पूरी हो रही हैं यह भविष्यवाणियां मौहम्मद के चाहने वालों ने उनके नाम से गढ़ दीं हांेगी क्योंकि 1000 साल से भी पहले छपी किताबों में यह भविष्यवाणियां मौजूद हैं। इसी प्रकार अवतार मौहम्मद द्वारा अपनी ज़िंदगी मेें दिखाए गए चमत्कार भी उस नूरानी आत्मा की मौजूदगी को साबित कर रहे हैं जो उनके शरीर को आफिस के रूप में प्रयोग कर रही थी।
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हैरतअंगेज़ चमत्कार
कई लोग चमत्कारों की बात सुनते हैं तो बोल उठते हैं कि उस समय के लोगों ने अपनी कमअक़ली के कारण कुछ आम बातों को न समझ पाने के कारण उन्हें चमत्कार कहना प्रारंभ कर दिया। यह लोग भूल जाते हैं कि साईंस उस natural phenomena को पढ़ने का नाम है जो निराकार एबसोलूट द्वारा साकार और दिव्यात्माओं के क्रिएशन के बाद आदम को क्रिएट करने से पहले वजूद में आया। वह natural phenomena आज भी ज्यों का त्यों काम कर रहा है। जहां यह natural phenomena टूटता है या अक़ल हैरान हो जाती है उसी को चमत्कार कहते हैं। अवतार मौहम्मद द्वारा दिखाए गए अनेक चमत्कार ऐसे हैं कि आज भी साईंस से उनके सबूत मिलते दिखाई पड़ते हैं। लेकिन यह भी सच है कि हर चमत्कार साईंस से नहीं समझा जा सकता।
यहां पर यह बताना आवश्यक है कि केवल चमत्कार देखकर ही किसी व्यक्ति का बड़ा डिवाईन रोल समझ नहीं आ सकता। मैं अपने लेखों और लैक्चर्स में दिखाता आया हूँ कि परमात्मा ने नूर और जुलमत, दो ताक़तों को क्रिएट किया, जो दोनों इंसान को अपनी ओर खींचने में लगे हैं। दोनों को बराबर की ताक़त दी गई क्योंकि यदि एक को अधिक ताक़त दी होती तो यह परमात्मा की अदालत के खि़लाफ होता। हमसे यह उम्मीद की जाती है कि अक़ल की जो नेयमत हमको दी गई है हम उसको प्रयोग करते हुए सत्य मार्ग और उसके पथप्रदर्शकों को पहचानेंगे और उस मार्ग पर आगे बढ़ेंगे। लेकिन जैसा मैंने कहा नूर के नुमाईंदे और जुलमत के नुमाईंदे दोनों के पास ऐसे चमत्कार दिखाने की ताक़त है कि हमारी अक़लें दंग रह जाएं। इस कारण केवल चमत्कार देखकर किसी को सत्य मार्ग का पथप्रदर्शक समझ लेना ग़लत है। हमको अक़ल से यह भी समझना होगा कि चमत्कार दिखाने वाला हमें रूहानियत के मार्ग पर लगा कर एक खुदा की इबादत और बंदगी की ओर ला रहा है या उससे दूर ले जा रहा है।
यह भी समझना आवश्यक है कि सत्य मार्ग के पथप्रदर्शकों द्वारा दिखाया गया चमत्कार आंखों का धोका नहीं होता। परमात्मा जिसने हर चीज़ cause and effect के घेरे में डाल रखी है, वह चमत्कार तमाम सृष्टि के सिस्टम में ऐसे बदलाव लाता है कि हमारी आंखें नए causes के बदले में नए effects देखती है। कई बार causes के बदले में effects ऐसे भी हो सकते हैं कि हमारी समझ से बाहर हों। जैसे आप देखेंगे कि अवतार मौहम्मद ने एक साथी की याद्दाश्त ऐसी बढ़ा दी कि वह कुछ भी नहीं भूलता था। या उनकी उंगलियों के पोरों से इतना पानी निकला कि 1500 व्यक्तियों ने पीया, जानवरों ने पीया और फिर भी पानी समाप्त नहीं हुआ। इस सब को cause and effect के घेरे में आप कैसे रखेंगे? आप मानने पर मजबूर हो जाएंगे कि सृष्टि के क्रिएशन के समय परमात्मा द्वारा बनाई गई नूरानी हस्तियों के कारण ही nature है और यह उस nature को बदलने की भी कुदरत रखते हैं।
उदाहरण के तौर पर चांद के दो भागों में बंट जाने वाला चमत्कार देखते हैं। अवतार मौहम्मद द्वारा इशारा करने पर चांद दो भागों में विभाजित हो कर दिखने लगा। यह केवल आंखों का धोका नहीं था, बल्कि इतिहासकार लिखते हैं कि अरब के पूरब में अनेक स्थानों पर यह चमत्कार देखा गया। आप पूछेंगे कि पश्चिम में क्यों नहीं? इसलिए कि हो सकता है कि पश्चिम मेें उस समय तक रात्री हुई ही न हो।
कुरान की आयत कह रही हैः ‘करीब आ गई क़यामत और दो टुकड़े हो गया चांद। जब भी यह झुटलाने वाले अल्लाह की ओर की कोई निशानी देखते हैं वे कह उठते हैं कि यह तो खुला हुआ जादू है। और वे उस निशानी से मुंह भी फेर लेते हैं। उन्होंने मौहम्मद के लिए जाहिर हुई निशानी को भी झुटलाया और अपनी नफसानी ख़्वाहिशों पर चले। हर काम के लिए एक अंजाम मुक़रर है।’
अवतार मौहम्मद के सहाबी इब्ने अब्बास के अनुसार अरब में से झुटलाने वालों में से कुछ ने अवतार मौहम्मद से कहा कि अपनी नुबूवत की कोई निशानी हम को दिखलाएं। हम काबा के करीब मिना के मक़ाम पर मौजूद थे। चांद के दो टुकड़े ऐसे हुए कि एक टुकड़ा हिरा पहाड़ के दाईं तरफ और दूसरा बाईं तरफ दिखाई दे रहा था। इस समय अवतार मौहम्म्द ने कहा कि ‘गवाह हो जाओ कि अल्लाह ने मेरे लिए यह मोजिज़ा यानी चमत्कार ज़ाहिर किया।’
अल्लामा मौदूदी ने कुरान पर अपनी कमेंटरी में लिखा है कि मालाबार के तट पर और जयपुर की रायल आॅबसरवेटरी तक में यह चमत्कार देखा गया जो उस समय की किताबों में दर्ज भी हुआ। आज के पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रात के अंधेरे में अपने महल की छत पर टहल रहे राजा भीम सेन ने अपनी आंखों से देखा कि चंद्रमा दो भागों में विभाजित हो गया। पाकिस्तान से छपी एक पुस्तक में इस वाक़ये का बहुत विस्तार पूर्वक विवरण मौजूद है।
राजा भीम सेन ने जब चंद्रमा को दो भागों में विभाजित होते देखा तो दूसरे दिन उन्होंने अपने दरबार से जुड़े तमाम बड़े पंडितों और ज्योतिषों को तलब करके उनसे इसका कारण पूछा। कोई भी इसका कारण नहीं बता सका।
क़रीब एक वर्ष बाद अरब की ओर गए व्यापारिक क़ाफिले वापिस आए तो उन्होंने बताया कि अरब में अपने को खुदा का पैग़म्बर बताने वाले एक व्यक्ति ने इशारे से चंद्रमा के दो टुकड़े कर दिए। यह जानने पर राजा भीम सेन का कोतूहल और बढ़ गया और फलस्वरूप उसने अपने मंत्री रतन सेन को कुछ भेंट लेकर अरब की ओर भेजा ताकि वह स्वयं आकलन कर सकें कि खुदा का पैग़म्बर होने का दावा करने वाला व्यक्ति सच्चा है कि झूठा।
पुस्तक बताती है कि राजा भीम सेन ने अपने मंत्री रतन सेन के हवाले तीन चीज़ें कीं और कहा कि यह तीनों वस्तुएं अपने को पै़गम्बर होने का दावा करने वाले व्यक्ति को भेंट स्वरूप देना। यदि वह सच्चा पैग़म्बर है तो इन तीनों वस्तुओं को पहचान लेगा, क्योंकि अरब में यह तीनों वस्तुएं नहीं पाई जातीं। यह तीन वस्तुएं थींः सरौता, छाली और कमरबंध।
लिखा है कि रतन सेन पहले मक्का पहुंचा परन्तु उस समय तक अवतार मौहम्मद मक्का से हिजरत करके मदीना जा चुके थे। फिर रतन सेन ने मदीना का रूख किया। अभी वह मदीना के समीप ही पहुंचा था कि शहर से अवतार मौहम्मद अपने कुछ साथियों के साथ इस क़ाफिले के स्वागत के लिए स्वयं आते दिखाई दिए। इससे पहले कि रतन सेन उनसे राजा भीम सेन द्वारा दिए गए उपहार की कुछ बात कर पाते, अवतार मौहम्मद ने रतन सेन की ही भाषा में उसका स्वागत करते हुए तीनों उपहारों का नाम बताते हुए कहा कि वह उन उपहारों को उन्हें सौंप दे। रतन सेन और उसके साथी दंग रह गए।
रतन सेन कई वर्षों तक मदीना में रूका रहा और आज भी इतिहास की किताबों में 40 के क़रीब हदीसें रतन सेन के नाम से दर्ज हैं।
सिर्फ इतना ही नहीं, चंद्रमा की फोटो खींचने वाले उपग्रह आज भी जब चंद्रमा की धरती की फोटो खींचते है तो उन्हें एक लम्बी लकीर चंद्रमा के बड़े हिस्से पर एक छोर से दूसरे छोर तक खिंची नज़र आती है, जो एक गड्ढे के समान है, और आज तक चंद्रमा के दो हिस्से होने वाले चमत्कार की ओर इशारा कर रही है। चंद्रमा के धरातल पर खिंची यह लकीर कोई भी गूगल करके देख सकता है। कोई साईंटिस्ट इसका कारण नहीं बता सकता। केवल और केवल अवतार मौहम्मद को मानने वालों की पुस्तकों में इस ओर इशारा मिलता है।
अवतार मौहम्मद के कई चमत्कार यानी मोजिज़ात ऐसे देखने को मिलते हैं जो physical phenomena of nature को तोड़ते नज़र आते हैं। हम यहां कुछ ही चमत्कार पेश कर रहे हैं।
अवतार मौहम्मद के तीन मोजिज़े ऐसे हैं जिनका उल्लेख कुरान में आया है। इसके अतिरिक्त उनके सैकड़ों मोजिज़े हैं जिनका उल्लेख हमको हदीस की किताबों में पढ़ने को मिलता है जो सब दलीलें हैं इस बात की कि मौहम्मद पैग़म्बर यानी अवतार थे।
कुरान में वर्णित तीन मोजिज़ों में सब से पहला स्वयं कुरान है। इसकी बात बाद में करेंगे। दूसरा मोजिज़ा जिसका वर्णन कुरान में आया वह अल-इसरा वल मेराज है। यानी एक ही रात में अवतार मौहम्मद का बैतुल्लाह यानी काबा से बैतुलमुक़द्दस तक का सफर और वहां से आसमान की सब से ऊंची बुलंदी तक का सफर। कुरान साफ शब्दों में कह रहा है कि मौहम्मद और परमात्मा के दरमियान दो कमान या उससे भी कम की दूरी रह गई। इसी प्रकार शक़कुल क़मर यानी चांद के दो टुकड़े होने वाले चमत्कार का उल्लेख सूरह क़मर मेें मौजूद है।
अवतार मौहम्म्द के लिए कहा जाता है कि उन्होंने ढूबे हुए सूर्य को पलटाया। इस चमत्कार का उल्लेख मैंने ऋग वेद में भी पाया है। जिस समय वेदों का फिर से अनुवाद होगा, आप देखेंगे कि सब हक़ीक़तें दिन के उजाले की तरह साफ हो जाएंगी।
इसी प्रकार का चमत्कार जोशुआ यानी यूशा इब्ने नून के समय हुआ जब सूरज का ढलना कुछ समय के लिए रूक गया और दिन की अवधी इतनी बढ़ गई कि युद्ध जारी रह सके। कुरान ने इस चमत्कार का उल्लेख किया है। चूंकि कृष्ण के जीवन काल में भी युद्ध के दौरान सूर्य की गति रूक जाने से दिन की अवधि बढ़ने का उल्लेख मिलता है, ताकि युद्ध जारी रह सके, इस कारणवश कई लोग कहते हैं कि यूशा इब्ने नून और कृष्ण एक ही हस्ती के नाम हैं। पर हम इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। कृष्ण अवतार थे यह साबित है और यूशा इब्ने नून भी अवतार थे, यह बाईबल और कुरान से साबित है। यह भी मुमकिन है कि एक ही चमत्कार दो इलाक़ों में आए विभिन्न अवतारों ने दिखाया हो।
आईए कुछ अन्य चमत्कार देखते हैंः
सहीह बुख़ारी के अनुसार अवतार मौहम्मद के एक साथी अब्दुल्लाह इब्ने अतीक़ की पिंडली की हड्डी टूट गई। उन्होंने अपनी पगड़ी को उतार कर पैर पर बांधा और इसी हालत में अवतार मौहम्मद के सामने आए। अवतार मौहम्मद ने अपने हाथ को उनके पैर पर फेरा और देखते ही देखते उनके पैर की हड्डी ऐसे जुड़ गई जैसे टांग कभी टूटी ही नहीं थी।
इसी प्रकार सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम के अनुसार जाबिर इब्ने अब्दुल्लाह से रिवायत है कि सुलह हुदैबिया के मौक़े पर मुसलमानों के पास पानी कम पड़ गया। यहां तक कि केवल एक पानी का बर्तन था। उससे भी अवतार मौहम्मद ने वुजू किया और बस थोड़ा सा पानी बचा रह गया। सब के सब उनकी खि़दमत में हाज़िर हुए और पानी के समाप्त हो जाने की जानकारी दी। अवतार मौहम्मद ने उस बर्तन में अपना हाथ रखा और सहाबा कहते हैं कि उनकी ऊंगलियों के पोरों से पानी के चश्मे फूट पड़े। रिवायत के अनुसार तमाम सहाबियों ने जिनकी संख्या करीब 1500 लोगों की थी उस पानी से वुजू भी किया, स्वयं भी पिया, जानवरों को भी पिलाया और स्टोर भी कर लिया।
एक और मोजिज़ा जो सहीह मुस्लिम में दर्ज है उसके अनुसार जाबिर बिन अब्दुल्लाह कहते हैं कि एक सफर में हम साथ थे। अवतार मौहम्मद को शौच के लिए जाने की आवश्यकता हुई। दूर तक फैला हुआ मैदान था। उसके एक किनारे पर एक पेड़ था और दूसरे किनारे पर दूसरा पेड़ था। अवतार मौहम्मद ने एक पेड़ की टहनी को पकड़ा और कहा कि अल्लाह के हुक्म से मेरी फरमांबरदार हो जा। वह पेड़ ऐसे उनके पीछे चल पड़ा जैसे कोई घोड़े की लगाम पकड़ कर चलता है। दूसरी ओर का पेड़ भी ऐसे ही चलता हुआ आया और दोनों पेड़ जुड़ गए जिसकी आड़ में अवतार मौहम्मद शौच संबंधी आवश्यकता से फारिग़ हुए। फिर आप ने उन पेड़ों को हुक्म किया तो वे उसी प्रकार वापिस अपनी जगह पर चले गए। जाबिर बिन अब्दुल्लाह अंसारी कहते हैं कि ऐसा होते उन्होंने अपनी आंखों से देखा।
एक और चमत्कार जो सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम दोनों में दर्ज है उसके अनुसार अनस बिन मालिक कहते हैं कि एक बार मदीना में सूखा पड़ गया। अवतार मौहम्मद जुमे का खुतबा दे रहे थे कि एक व्यक्ति बीच में खड़ा हुआ और शिकायत की कि ऐ अल्लाह के रसूल, हमारे मवेशी मर गए, हमारा भी प्यास से बुरा हाल है, चारों ओर सूखा है, अल्लाह से दुआ कीजिए कि वर्षा हो। अवतार मौहम्मद ने उसी समय दुआ के लिए हाथ बुलंद किए और दुआ करके मिम्बर से नीचे भी नहीं उतरे थे कि इतनी तेज़ वर्षा हो रही थी कि आपकी दाढ़ी से पानी की बूंदें नीचे गिर रही थीं। ऐसी वर्षा हुई कि पूरे सप्ताह होती रही। अगले जुमे को वही व्यक्ति खड़ा हो गया कि ऐ अल्लाह के रसूल, हमारे मकान गिर गए वर्षा के कारण, अल्लाह से दुआ कीजिए कि हमारी ज़मीनों पर तो वर्षा हो, हमारे घरों पर वर्षा न हो। रिवायत के अनुसार अवतार मौहम्मद ने उंगली से इशारा किया, जहां जहां इशारा करते बादल फटते जाते, मदीना के चारों ओर वर्षा हो रही थी, लेकिन मदीना में ज़रा भी वर्षा नहीं हो रही थी। यह चमत्कार अवतार मौहम्मद को दिखाना इसलिए भी आवश्यक था कि एक और सबूत मिल जाए कि यह वही इंद्र हैं जो सनातन मान्यताओं के अनुसार तमाम पृथ्वी पर कहां वर्षा हो और कहां न हो, इसके ज़िम्मेदार हैं।
सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम में दर्ज एक और चमत्कार जो अबू हुरैरा ब्यान करते हैं उसके अनुसार उन्होंने अवतार मौहम्मद से कहा कि मैं आप से बहुत कुछ सुनता हूँ परन्तु भूल जाता हूँ। अवतार मौहम्मद ने कहा कि अपनी चादर बिछाओ। आप ने आसमान की ओर हाथ करके मुट्ठी भरी और चादर पर रख दी और अबू हुरैरा से कहा कि इसको अपने सीने से लगा लो। अबु हुरैरा कहते हैं कि उसके बाद से अवतार मौहम्मद से सुनी कोई भी रिवायत मैं आज तक नहीं भूला।
सहीह मुस्लिम की एक और रिवायत के अनुसार अबू हुरैरा ने अवतार मौहम्मद से कहा कि मेरी मां आप को बहुत बुरा भला कहती है। मैं तंग आ गया हूँ आपकी बुराई सुन सुन कर। कृप्या मुझे और सब्र के लिए न कहें, बल्कि दुआ कर दें। अवतार मौहम्मद ने दुआ के लिए हाथ उठाए। अबु हुरैरा घर पहुंचे तो पाया कि उनकी मां ने नहा धो कर अपने को पवित्र किया और बेटे को देखते ही कहा कि मैं गवाही देती हूँूं कि अल्लाह एक है और मौहम्मद उसके रसूल यानी अवतार हैं। मुझे अवतार के पास ले चलो।
अबू हुरैरा के कथन से साफ है कि जब वह अपनी मां की शिकायत अवतार मौहम्मद से करते थे तो वह उन्हें सब्र करने का निर्देश देते थे। जो लोग आरोप लगाते हैं कि मौहम्मद अपने को बुरा भला कहने वालों के साथ बदसलूकी से पेश आते थे वे जान लें कि अवतार मौहम्मद या उनकी शिक्षा पर चलने वाला कोई भी व्यक्ति दुश्मनी रखने वाले से भी बुरा सुलूक नहीं कर सकता और न ही उसको क़त्ल करने की सोच सकता है क्योंकि युद्ध केवल और केवल उस समय लाज़मी होता है जब दुश्मन तुम पर हमलावर हुआ हो। अन्यथा ‘तुम्हारा दीन तुम्हारे लिए, मेरा दीन मेरे लिए’, ऐसा कुरान ने कहा।
एक और चमत्कार बताते हैं जो सहीह बुख़ारी में दर्ज है। जाबिर बिन अब्दुल्लाह के अनुसार अवतार मौहम्मद मस्जिदे नबवी में एक खजूर के तने के साथ टेक लगा कर खुतबा देते थे। एक अंसारी औरत ने आपके लिए मिम्बर बना कर पेश किया। आप उस मिम्बर पर बैठ कर खुतबा देने के लिए जैसे ही चढ़े कि वहां मौजूद सहाबियों ने चीख़ों की आवाज़ सुनी। सब हैरान थे कि चीख़ों की आवाज़ कहां से आ रही है। अवतार मौहम्मद मिम्बर से उतरे और उस खजूर के पेड़ के पास आकर अपना हाथ उस पर फेरा। वहां उपस्थित लोगों का कहना है कि वह पेड़ ऐसे खामोश हुआ जैसे कोई बच्चा रोते रोते ख़ामोश हो जाता है। पेड़ भी गौरांवित महसूस कर रहा था कि अवतार मौहम्मद उससे टेक लगा कर खुतबा दिया करते थे जो अब नहीं देंगे। यदि आप ने सुना है कि पेड़ों में भी जान होती है तो यह उसका सबूत था। हमारे कान इस लाएक़ नहीं कि आम हालात में पेड़ों की बातें सुन सकें।
इससे साबित है कि अवतार मौहम्मद तमाम जानदारों की बोलियां भी सुन सकते थे। अवतार मौहम्मद से पहले हम नबी सुलेमान के बारे में पढ़ते हैं कि वह भी चींटी, पक्षी, जिन्नात आदि की बातें सुना करते थे।
सुनन इब्ने दाऊद में दर्ज है कि अवतार मौहम्मद एक बाग़ में गए तो एक ऊंट दौड़ता हुआ आप के समीप आया। उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे। उसने अवतार मौहम्मद से कुछ शिकायत की। आप ने उस ऊंट के मालिक को तलब किया और कहा कि इस बेज़बान के मामले में अल्लाह से डर जा क्योंकि इसने मुझ से शिकायत की है कि यह मुझे खाना बहुत कम देता है और काम बहुत अधिक लेता है। बेज़ुबान जानवरों से अच्छा सलूक किया करो।
सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम में दर्ज एक और चमत्कार के अनुसार अवतार मौहम्मद ने फरमाया कि क्या तुम समझते हो कि मेरा रूख़ क़िबले की ओर है तो मैं तुम्हें नहीं देख रहा। मैं ईंट के पीछे भी तुम्हें देख लेता हूँ और तुम्हारे दिल की नीयतों को जानता हूँ। इस क़िस्म के ब्यान पर कोई भी दुनियापरस्त इंसान इसको बड़बोलापन कह कर अलग हो सकता है। यही कारण है कि कुरान और गीता दोनों ने कहा कि हिदायत केवल सत्यमार्ग पर चलने वाले को ही मिलेगी। जो इस मार्ग पर नहीं चल रहा उसको गीता या कुरान की आयतें सुनाना भी नहीं चाहिए। जिसकी रूह पाकीज़गी के किसी लेवल पर है वही इन रूहानी हस्तियों की समझ बना सकता है। अफसोस की बात यह है कि आज कितने ही लोग कुरान केवल इसलिए पढ़ने बैठते हैं कि उसमें खोट निकाल सकें। ऐसे व्यक्तियों को हिदायत क्योंकर मिलेगी। यदि इन्होंने गीता को ही वैसे समझा होता जैसा परमात्मा चाहता है, तो यह ऐसा नहीं कर रहे होते।
सहीह बुख़ारी में दर्ज एक चमत्कार के अनुसार अब्दुल्लाह इब्ने मसूद कहते हैं कि एक सफर के दौरान पानी कम पड़ गया। अवतार मौहम्मद के सामने पानी का एक कटोरा पेश किया गया तो मैंने अपनी आंखों से देखा कि आपकी उंगलियों के पोरों से पानी निकलना प्रारंभ हुआ जिससे सब साथियों ने वुजू की। इब्ने मसूद कहते हैं कि जब हम अवतार मौहम्मद के साथ बैठकर खाना खाया करते थे तो उस खाने से भी अल्लाह की हम्द की आवाज़ आया करती थी।
शायद यही कारण है कि गीता ने कहा कि यदि तुम खाना खाया करो तो तुम पर लाज़मी है कि अपने खाने को देवताओं को अर्पित कर दिया करो, तब खाया करो। क्योंकि कृष्ण के मुख से बोलने वाला परमात्मा जानता है कि उसने इन देवताओं को तमाम रिज़्क़ का मालिक बनाया है। अवतार मौहम्मद के हाथ पर आकर कंकड़ भी खुदा की हम्द पढ़ने लगता था। यही बात कुरान कह रहा है कि कोई भी चीज़ ऐसी नहीं है जो अल्लाह की हम्द यानी उपासना के साथ तसबीह न पढ़ती हो लेकिन तुम उनकी तसबीह को समझ नहीं सकते। यजुर्वेद कहता है कि सूरज, चांद, सितारे, धरती, हर चीज़ उस खुदा की उपासना और वंदना में लगी है।
सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम में दर्ज एक और मोजिज़े के अनुसार जाबिर बिन अब्दुल्लाह कहते हैं कि खं़दक़ के युद्ध के मौक़े पर हम लोग अवतार मौहम्मद की खि़दमत में पहुंचे और अर्ज़ की खं़दक यानी खाई खोदने में एक बड़ा पत्थर ऐसा है जो हम से नहीं टूट रहा। अवतार मौहम्मद वहां पहुंचे। सहाबा के अनुसार उस समय आप के पेट पर भूख के कारण पत्थर बंधे हुए थे। आप ने एक कुदाल मारी और पूरी चट्टान रेत के समान बैठ गई।
जाबिर कहते हैं कि तमाम साथी 3 दिन के भूखे थे। मैंने इरादा किया कि अवतार मौहम्मद को घर ले जाकर उन्हें खाना खिलाऊं। जाबिर अपनी पत्नी के पास आए और पूछा कि खाने को कुछ है। पत्नी ने कहा कि करीब ढाई किलो जौ है, उसको पीस कर मैं आटा बना लेती हूँ और एक बकरी का बच्चा है जिसका मांस पका लेती हूँ। आप अवतार मौहम्मद के साथ पांच छह लोगों को बुला लें कि वे खाना खा सकें। जाबिर ने अवतार मौहम्मद से चुपके से कहा कि आप आज का खाना मेरे घर खाएं। अवतार मौहम्मद ने बुलंद आवाज़ में सब साथियों से कहा कि आज सबकी जाबिर के घर दावत है। जाबिर जानते थे कि इतने लोगों का खाना उनके घर पर उपलब्ध नहीं है। आप ने कहा कि जब तक मैं ने आऊं, हांडी को आग पर से नीचे न उतारना और रोटियां पकाना शुरू न करना। अवतार मौहम्मद ने आकर अपने मुंह का थूक उस हांडी में डाला और दुआ की और कहा कि पतीली से खाना निकालते जाओ और रोटियां बनाते जाओ। करीब एक हज़ार लोग एक के बाद एक आए और खाना खाकर चले गए और जाबिर का कहना है कि मेरे खाने में ज़रा भी कमी नहीं हुई।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि यदि आप की उंगली से पानी निकल सकता था और आप खाने में इतनी बरकत दे सकते थे कि थोड़ा सा खाना 1000 लोग खा लें तो फिर भूख के कारण पेट पर पत्थर बांधने की क्या आवश्यकता थी? समझना होगा कि यह भूख उनके निजी शरीर के लिए थी। इसी शरीर से उन्होंने बेइंतेहा इबादत की थी तब तो नूरानी रूह यानी दिव्यात्मा ने उस शरीर को अपनाने लाएक़ समझा। ईसा भी इसकी पुष्टि कर रहे थे जब वह चमत्कार दिखाने पर कहते थे कि यह होली स्प्रिट ने किया लेकिन जब उनको मारा पीटा जा रहा था तो कोई चमत्कार नहीं हुआ। कृष्ण अवतार थे और सूर्य तक पलटा दिया, लेकिन जब मौत आई तो किसी शिकारी का तीर पैर की ओर आता हुआ नहीं रोका या यदि तीर लग गया था तो उसके कारण मौत को नहीं टाला।
सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम के अनुसार अवतार मौहम्मद के शरीर पर चटाई के निशान देख कर उमर रोने लगे कि दुनिया के राजा महलों में आलीशान ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं और आपकी यह हालत है। अवतार मौहम्मद ने उत्तर दिया कि उमर, इस दुनिया की हक़ीक़त अभी तक तुम पर नहीं खुली है। ऐ उमर क्या इस बात पर राज़ी नहीं हो कि अन्य बादशाह दुनिया के मज़े लूटें और हम स्वर्ग में अपने कर्मों की जज़ा लें।
पुस्तिका के लेखक सच्चाई से एकदम विपरीत यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि अवतार मौहम्मद गुलामों और औरतों के बीच दुनिया के मज़े लूटा करते थे। समस्या यह है कि यदि किसी ने कुछ हकीकतें समझने की कोशिश की हो और ठीक ठीक न समझ सका हो, तब तो उसको समझाया जा सकता है। जो केवल और केवल झूठ बोलने पर तुला हो, उसका क्या किया जाए? रूहानियत, सादगी और सच्चाई का कोई मसीहा था तो अवतार मौहम्मद थे। 7 दिव्यात्माओं में से एक ने उनके शरीर को प्रयोग किया तो वेदों ने इंद्रदेव नाम दिया और दुनिया ने उन्हें मौहम्मद के नाम से जाना।
आगे बढ़ते हैं! सहीह मुस्लिम और सहीह बुख़ारी के अनुसार उम्मे सुलैम एक बूढ़ी औरत थीं। अवतार मौहम्मद उनके पास जाते थे तो वह चटाई बिछा देती थीं जिस पर वह आराम किया करते थे। एक बार अवतार मौहम्मद आराम कर रहे थे तो उम्मे सुलैम उनके माथे का पसीना पोंछ कर एक बरतन में जमा कर रही थीं। अवतार मौहम्मद की आंख खुल गई तो उम्मे सुलैम ने कहा कि मौहम्मद इस पसीने में बड़ी बेहतरीन सुगंध आती है। हम इस पसीने को न केवल इत्र के रूप में बल्कि बरकत के लिए भी प्रयोग करते हैं। अवतार मौहम्मद ने कहा कि ऐ उम्मे सुलैम तुम ने बहुत अच्छा काम किया।
अफसोस कि जिस मौहम्मद का पसीना सहाबा सुगंघ के लिए और बरकत के लिए प्रयोग करते थे उनके शरीर के सब से प्यारे टुकड़े फातिमा को उन्हीं सहाबियों ने ऐसी तकलीफ पहुंचाई कि छह महिने के भीतर फातिमा यह कहती हुई दुनिया से गईं कि ‘ऐ बाबा, आपके बाद मुझ पर इतने जुल्म ढाए गए कि यदि सूरज पर पड़ते तो वह सियाह हो जाता’।
यह ऐसा ही ही है जैसे बुद्ध के मरने के 14 दिन बाद जब उनका क्रिया क्रम होने को था तो उनके चाहने वाले उनके शरीर पर पहने वस्त्र के टुकड़े नोच नोच कर ले गए लेकिन उसके तुरंत बाद जब बड़े लोगों की मीटिंग हुई तो उन्होंने फैसला किया कि बुद्ध चाहते थे कि उनकी जिंदगी के हालात का संयोजन नहीं किया जाए, इसलिए कोई भी उनकी जिंदगी के हालात जमा नहीं करेगा। समझिए कि कैसे जुलमत हर ज़माने में सत्य मार्ग की समझ से हमें विचलित करने की कोशिश में लगी है। वह हमारे इतना क़रीब है लेकिन हम समझ नहीं रखते, और इतनी ही शक्तिशाली है जितना कि नूरानी ताक़तें क्योंकि यदि परमात्मा ने दोनों को बराबर की शक्ति न दी होती तो उनमें से किसी एक पर जुल्म होता और हमेशा अदालत करने वाला परमात्मा जुल्म कैसे कर सकता है?
ग़ज़वै हुनैन के मौक़े पर 12000 मुसलमानों में से केवल 80 अवतार मौहम्मद के साथ रह गए और तमाम दूसरे भाग खड़े हुए। सहीह बुख़ारी और सही मुस्लिम कंे अनुसार अवतार मौहम्मद सब से आगे यह कहते हुए युद्ध कर रहे थे कि मैं अल्लाह का पैग़म्बर हूँ, मुझे कोई भी शक नहीं है, और मैं अब्दुल मुत्तलिब का पोता हूँ। लड़ते हुए अवतार मौहम्मद ने मुट्ठी में मिट्टी ली और यह कहते हुए दूसरी ओर फेंकी कि इन सब के चेहरे झुलस जाएं। सहाबा कहते हैं कि अल्लाह की क़सम, हमने अपनी आंखों से देखा कि दूसरी ओर से लड़ने आए सब के सब लोग अंधे हो गए और शिकस्त खाकर भाग खड़े हुए।
इस वाक़ये का उल्लेख करते हुए कुरान, सूरह अनफाल, की आयत कहती है कि ‘ऐ रसूल, जब आप ने वह मुट्ठी फेंकी थी, वह हम ने फेंकी थी’। आप ने देखा कि जिस प्रकार कृष्ण के मुख से परमात्मा बोल रहा था वैसे ही मौहम्मद के मुख से कुरान की शकल में न केवल परमात्मा बोल रहा है बल्कि उनके द्वारा किए गए कर्मों को भी अपना बता रहा है। यह राज़ समझने वालों के लिए मुश्किल नहीं कि वे इन चमत्कारों का रहस्य समझ सकें।
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सटीक भविष्यवाणियां
अब आईए, देखते है कि आगे होने वाले वाक़्यात की भविष्यवाणी अवतार मौहम्मद कैसे दिया करते थे। सहीह मुस्लिम के अनुसार उमर कहते हैं कि अवतार मौहम्मद ने बद्र के युद्ध से एक दिन पहले ज़मीन पर लकीरें खींचीं और फरमाया कि कल अबू जहल की लाश यहां पर पड़ी होगी, उतबा की लाश यहां पड़ी होगी, ऐसे ही औरों के बारे मंे बताया। उमर कहते हैं कि अवतार मौहम्मद ने ज़मीन पर जो निशान लगाए थे, दूसरे दिन हर लाश ठीक उसी स्थान पर पड़ी थी।
सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम दोनों में दर्ज एक मोजिज़े के अनुसार गज़वै हुनैन के मौक़े पर एक व्यक्ति जो आप के साथियों में शामिल था और बड़े जोश से लड़ रहा था, अवतार मौहम्मद ने उसके लिए कहा कि यह जहन्नमी है। सहाबा कहते हैं कि हमारे दिल में शक आने प्रारंभ हो गए। एक सहाबी के कथनुसार मैं उसके पीछे पीछे हो लिया। मैंने देखा कि जब उस व्यक्ति के शरीर पर कई जख़्म आए तो उसने अपने तरकश से एक तीर निकाल कर आत्महत्या कर ली। वह सहाबी वहां से भागा भागा आया और कहा कि हे रसूल आप ने सत्य कहा था, उसने आत्महत्या कर ली। इस पर अवतार मौहम्मद ने कहा कि मैं गवाही देता हूँ कि मैं अल्लाह का बंदा और उसका रसूल यानी अवतार हूँ।
सहीह बुख़ारी के अनुसार अवतार मौहम्मद ने अपने नवासे हसन को गोद में उठा कर कहा कि मेरा यह बेटा सरदार है, इसके कारण अल्लाह मुसलमानों के दो गिरोहों में सुलह करा देगा। अवतार मौहम्मद के गुज़रने के 30 वर्ष बाद हसन ने अपनी खि़लाफत की कुरबानी देते हुए माविया से सुलह की और लाखों मुसलमानों को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया।
सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम दोनों में दर्ज एक चमत्कार के अनुसार अनस इब्ने मालिक का ब्यान है कि एक व्यक्ति ईसाईयों में से अवतार मौहम्मद के रास्ते पर आया और उन्होंने उसको कुरान की नई आने वाली आयतें लिखने पर लगा दिया। फिर कुछ समय बाद वह ईसाईयों से जा मिला और कहना प्रारंभ कर दिया कि मौहम्मद को कुछ पता नहीं, जो मैं लिख देता हूँ वही मुसलमान कुरान समझ रहे होते हैं। इसी दौरान वह मर गया। अवतार मौहम्मद ने भविष्यवाणी की कि ज़मीन इस व्यक्ति को कुबूल नहीं करेगी।
ग़ौर करें, अवतार मौहम्मद ने उसको मारा नहीं, न ही धमकाया। हालांकि वह उन पर और कुरान पर इल्ज़ाम लगा रहा था। जब वह अपनी मौत मरा तो भविष्यवाणी की। उसके साथियों ने उसे जमीन में दफनाया, सुबह लाश बाहर पड़ी थी। उन्होंने बहुत गहरी क़ब्र खोद कर उसे फिर दफनाया, सुबह उसकी लाश फिर बाहर पड़ी थी। तीसरे दिन उन्होंने इतनी गहरी क़ब्र खोदी जितनी खोद सकते थे, अगले दिन फिर उसकी लाश बाहर पड़ी थी। तब लोगों को यक़ीन आया कि ऐसा अवतार मौहम्मद की भविष्यवाणी के अनुसार हो रहा है।
इसी प्रकार सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम दोनों का ब्यान है कि मस्जिदे नबवी की तामीर के मौक़े पर जब अवतार मौहम्मद ने देखा कि जहां दूसरे एक एक ईंट उठा कर ला रहे हैं वहीं अम्मार इब्ने यासिर जिनकी उम्र उस समय 60 वर्ष से अधिक थी दो दो ईंटे उठा कर ला रहे हैं। अवतार मौहम्मद ने अपने हाथों से उनके चेहरे से मिट्टी साफ की और कहा कि ऐ सुमय्या के बेटे तुझ पर वह बड़ी मुसीबत आएगी, तुझे एक बाग़ी जमाअत क़त्ल करेगी, तू उसे जन्नत की ओर बुला रहा होगा और वह तुझे जहन्नुम की ओर बुला रही होगी।
करीब चार दशक वर्ष बीत गए। अम्मार की उम्र 100 वर्ष से अधिक हो चुकी थी जब अली ने माविया से सिफ्फीन का युद्ध लड़ा। इस युद्ध में अम्मार अली की ओर से युद्ध में गए जहां वह ज़ख्मियों को पानी पिलाते क़त्ल कर दिए गए। अवतार मौहम्मद ने अपने दुनिया से जाने के करीब चार दशक बाद होने वाले युद्ध की न केवल भविष्यवाणी की बल्कि यह भी साफ तौर पर बता दिया कि अपने को हक़ पर कहने वाले दो गिरोहों में कौन सत्यमार्ग पर होगा और कौन बहका हुआ। अवतार मौहम्मद की अम्मार के लिए भविष्यवाणी से साफ था कि वह कैसे कत्ल होंगे, और यह भी कि युद्ध में कत्ल होंगे, न की बीमारी आदि से मौत पांएगे।
कितने अफसोस की बात है कि आज भी बेइंतेहा मुसलमान ऐसे हैं जो माविया को बड़ी इज़्ज़त की नज़र से देखते हैं जबकि अवतार मौहम्मद की भविष्यवाणी से साफ है कि उसने समय के इमाम और खलीफा के खि़लाफ बग़ावत की थी और मौत की सज़ा का हक़दार था।
अवतार मौहम्मद की अनगिनत भविष्यवाणियां जंगे सिफफीन, जंगे जमल और जंगे नहरवान को लेकर हैं। यह तमाम युद्ध अली ने अवतार मौहम्मद के दुनिया से गुजरने के बाद 26 से 30 वर्ष के भीतर लड़े। करबला के युद्ध, Constantinople पर मुसलमानों के कब्ज़े से लेकर तातारियों द्वारा मुस्लिम इलाक़ों को तहस नहस करने, ISIS आदि आतंकवादियों के नमूदार होने और उनकी पहचान और यहां तक कि दुनिया के अंत में मेहदी यानी कलकी के आने और क़यामत आने तक की अनगिनत भविष्यवाणियां किताबों को टटोलने वालों को पढ़ने को मिल जाएंगी। One God One Religion में हमने अन्य अहललबैत की ज़िंदगी से कई मोजिज़े यानी चमत्कार और भविष्यवाणियां पेश की हैं जो साबित करती हैं कि ये सब की सब हस्तियां एक ही सोर्स से थीं। अहललबैत के शरीर मेें वे दिव्यात्माएं थीं जो सृष्टी को बनाए जाते समय पैदा की गई थीं; इन हस्तियों के बारे में ही वेदों ने भविष्यवाणी की थी कि वे नवजात बच्चों के समान किसी छिपे हुए स्थान पर पैदा होंगे।
अफसोस कि उपरोक्त पुस्तिका के लेखक का इतिहास और सच्चाई से कोई सरोकार नहीं। जो लोग अवतार मौहम्मद की जिंदगी में उनके द्वारा दिखाए गए चमत्कारों को झूठ का पुलिंदा कह सकते हैं, वे कैसे झुठलांएगे यदि अवतार मौहम्मद द्वारा की गई कोई भविष्यवाणी, जो उनके जाने के कुछ वर्षों बाद किसी किताब का हिस्सा बन गई, बड़े समय बाद पूरी हुई या इस दौर में पूरी हो रही है?
यहां बताना आवश्यक है कि अवतार मौहम्मद को उनकी रिसालत यानी अवतार होने के सबूत के तौर पर जो इकलौता मोजिज़ा यानी चमत्कार दिया गया वह ‘कुरान’ है। मुर्दों को ज़िन्दा करना या हाथ की लाठी को ज़मीन पर डालने से एक बड़ा सर्प बन जाना, वे चमत्कार जो रिसालत के सबूत के रूप में पहले के अवतारों को दिए गए थे, अवतार मौहम्मद को उनकी रिसालत के सबूत के लिए यदि कोई चमत्कार दिया गया तो वह कुरान है। हालांकि मुर्दे को ज़िन्दा करने का चमत्कार भी अहललबैत ने दिखाया, ज़िन्दा की नमाज़े जनाज़ा पढ़वा दी गई तो वह मुर्दा पाया गया यह अली ने करके दिखाया, सर्प से बातें अली ने कीं, दुआ के लिए हाथ उठाने पर बारिश 10वें अहललबैत अली रिज़ा ने करवाई, खूंख्वार भूखे शेरों के बीच बैठ कर इबादत 13वें अहललबैत हसन असकरी ने की, ऐसे अनेक मोजिज़े यानी चमत्कार हैं जो इन अहललबैत ने अपनी ज़िंदगी में कर के दिखाए लेकिन साथ ही भरपूर शिद्दत से यह भी कहते दिखाई देते रहे कि हम तो केवल खुदा के बन्दे हैं और सारी इबादत और परस्तिश केवल उस एक खुदा के लिए ही जाएज़ है।
कुरान ने केवल अवतार मौहम्मद के समय के लोगों के सामने ही चैलेंज नहीं रखा कि यदि तुम इसको इंसानी किताब समझते हो तो इसके सबसे छोटे सूरह के जवाब में कुछ लिख लाओ। वे अरब जो समझते थे कि उनसे अधिक भाषा पर कोई कुदरत नहीं रखता, वे यह मानने पर मजबूर हो गए कि यह किसी इंसान का कलाम नहीं हो सकता।
कुरान का चैलेंज आज भी वैसे ही खड़ा है। कहना तो आसान है कि अवतार मौहम्मद जो कुछ कहना चाहते थे वह अल्लाह का कलाम बताते हुए अपने मानने वालों को बता देते थे। ज़रा सोचो तो, वह व्यक्ति जिसको किसी ने पढ़ना लिखना नहीं सिखाया कैसे अचानक भाषा का ऐसा धनी हो गया कि तमाम अरब उस कुरान के छोटे से छोटे सूरह का भी जवाब लाने में अपने को असक्षम पाते थे।
राज़ केवल कुरान ने खोला जब उसने कहा कि मौहम्मद को न तो किताब का ज्ञान था न ही ईमान, जब तक कि (नूरानी) रूह उनकी ओर नहीं भेज दी गई। क्या कोई व्यक्ति अपने बारे में ऐसा कुछ कह सकता है?
कुरान वह चमत्कार है जो अवतार मौहम्मद के ज़माने में भी चमत्कार था और अंतिम ज़माने तक के लिए चमत्कार है।
Quran.10.15:
… And when Our verses are recited to them as clear evidences, those who do not expect the meeting with Us say, “Bring us a Quran other than this or change it.” Say, [O Mohammad], “It is not for me to change it on my own accord. I only follow what is revealed to me. …
और आयतें देखिएः
Quran.46.9:
Say (O Mohammad), “I am not something original among the messengers, nor do I know what will be done with me or with you. I only follow what is revealed to me, and I am not but a clear warner.
Quran.6.50:
Say, [O Mohammad], “I do not tell you that I have the depositories (containing the provision) of Alah or that I know the unseen, nor do I tell you that I am an angel. I only follow what is revealed to me.” Say, “Is the blind equivalent to the seeing? Then will you not give thought?
Quran.7.203:
And when you, [O Mohammad], do not bring them a sign, they say, “Why have you not contrived it?” Say, “I only follow what is revealed to me from my Lord. This (Quran) is enlightenment from your Lord and guidance and mercy for a people who believe.
जैसे जैसे साईंस तरक़्क़ी की राहों पर आगे बढ़ रही है, कुरान का एक मोजिज़ा यानी चमत्कार होना और अधिक साफ होता जा रहा है।
कुरान का दावा है कि अनक़रीब हम जमीन-ओ-आसमान में, ऐसी निशानियां दिखाएंगे कि यह लोग चीख उठेंगे कि कुरान अल्लाह का कलाम है।
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